ऐतिहासिक रहा हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र - Arth Parkash
Saturday, September 22, 2018
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ऐतिहासिक रहा हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र

ऐतिहासिक रहा हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र

जो सार्वजनिक जीवन में घट रहा है, वही अगर संसद और विधानसभाओं में घटने लगे तो हैरानी और शर्मिंदगी होना लाजिमी है। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में जो घटा वह कुछ ऐसा ही था। महज 3 दिन चले सत्र का पहला दिन जहां दिवंगत नेताओं को श्रद्धाजंलि अर्पित करने में निकल गया वहीं दो दिन के अवकाश के बाद सोमवार और मंगलवार को चली कार्यवाही भी हंगामापूर्ण रही।

हालांकि इस दौरान भाजपा सरकार ने जहां कई बदलावकारी निर्णयों पर मुहर लगवाई वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विपक्ष को जता दिया कि अभी उनके तुणीर में बहुत से बाण बाकी हैं। सदन में भाजपा और इनेलो के बीच जब छिपे हुए गठजोड़ के आरोप लगे तो मुख्यमंत्री ने इनका भी प्रखरता से जवाब देते हुए कहा कि वे किसी के साथ नहीं, अपितु जनता के साथ हैं।

सत्र के आखिरी दिन जमकर अमर्यादित टिप्पणियां सुनने को मिलीं। नेता विपक्ष अभय चौटाला और कांग्रेस विधायक करण दलाल के बीच जो घटा वह निश्चित रूप से नहीं होना चाहिए था। विधानसभा प्रदेश हित में नए कानून बनाने और फैसले लेने के लिए जानी जाती है, उसमें अशोभनीय आचरण विधायिका पर भी सवाल खड़े करता है। प्रदेश में कर्मचारी सरकार के खिलाफ जंग छेड़े हुए हैं, वहीं चुनाव की आहट पाकर विपक्ष भी हमलावर है|

ऐसे में यह पहले से तय था कि सत्र हंगामेदार रहेगा। हालांकि सत्ता पक्ष और विपक्ष में इतनी गहरी खाई पनपेगी, ये आभास तक नहीं था। कांग्रेस विधायक करण दलाल को सदन से निलंबित कर दिया गया। राजनीतिक रूप से इसे भी सरकार की कामयाबी माना जा रहा है, भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा के समर्थक विधायक दलाल पर इनेलो विधायकों के समर्थन से कार्रवाई करवा कर अपना रास्ता साफ कर लिया।

माना जा रहा है कि पांचवीं बार विधायक बने दलाल मुखरता के साथ मुद्दे उठाकर सरकार और इनेलो को घेरने में कसर नहीं छोड़ रहे थे। गौरतलब है कि सदन में नेता विपक्ष अभय चौटाला और विधायक करण दलाल के बीच मारपीट की नौबत तक आ गई थी। मामला एक पंक्ति से शुरू हुआ था, जब राशन को लेकर दलाल ने कहा कि प्रदेश कलंकित हो गया है। इसके बाद जहां सत्ता पक्ष ने हमला बोला वहीं नेता विपक्ष भी बीच में कूद गए।

हालांकि इस दौरान बेहद आपत्तिजनक शब्दावली और व्यवहार का प्रदर्शन किया गया। स्पीकर कंवर पाल ने विधायकों को जो नसीहत दी, उस पर अमल होना चाहिए, उनका कहना था कि अगर इज्जत चाहिए तो सभी को संयमित व अच्छी भाषा का इस्तेमाल करना होगा। अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मत मारो। सदन में आचरण सुधारो वरना विधानसभा में बैठना मुश्किल हो जाएगा।

विधानसभा का मानसून सत्र सरकार के लिहाज से सफल रहा है, इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य में बिजली की दरों में कटौती की घोषणा भी की, यह सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि बिजली की बढ़ी दरों से जनता त्रस्त है, लेकिन अब उसे राहत मिलेगी। इस दौरान ढाणियों में भी बिजली पहुंचाने का सरकार ने वादा किया। वहीं मोरनी और मेवात में सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष वेतन और भत्तों की भी घोषणा की। हालांकि ये घोषणाएं ग्रामीण और कर्मचारियों के हित की हैं, लेकिन हड़ताली कर्मचारियों के प्रति सरकार का रूख कड़ा ही रहा।

मुख्यमंत्री ने आखिरी दिन रोडवेज कर्मचारियों जोकि नई प्राइवेट बसों की खरीद के खिलाफ सरकार के प्रति मोर्चा खोले हैं, को भी जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये बसें खरीदी जाएंगी और इनमें कंडक्टर सरकार की ओर से लगाए जाएंगे। उनका कहना था कि हमारा जनता के प्रति ज्यादा सरोकार है।

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