झारखंड जगुआर ने माओवादियों की कमर तोड़ी, नक्सल अभियान में दर्ज की बड़ी सफलताएं

झारखंड जगुआर ने माओवादियों की कमर तोड़ी, नक्सल अभियान में दर्ज की बड़ी सफलताएं

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Jharkhand Jaguars break the back of Maoists

रांची। झारखंड में माओवादियों के समापन से सुरक्षा बल चंद कदम ही दूर हैं। सारंडा में मुठभेड़ में माओवादियों को भारी क्षति के बाद उनके 25 साथियों का एक साथ आत्मसमर्पण कराने में झारखंड पुलिस की एंटी नक्सल फोर्स झारखंड 'जगुआर' का योगदान भी कम नहीं है।

केंद्रीय बलों की तरह सशक्त झारखंड जगुआर को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी कहते हैं। अलग राज्य बनने के बाद राज्य में माओवादियों के वर्चस्व को तोड़ने के लिए ही 19 फरवरी 2008 को आंध्र प्रदेश के ग्रे हाउंड बल की तर्ज पर झारखंड जगुआर का गठन किया गया था।

गुरिल्ला वार में निपुण इस बल ने अपने रण कौशल व 24 पदाधिकारियों-जवानों के बलिदान से माओवादियों को मात दी, उन्हें घुटने टेकने पर विवश किया।

2008 से 2025 तक झारखंड जगुआर के नाम भी है बड़ी उपलब्धियां

माओवादियों के विरुद्ध तैयार झारखंड पुलिस के इस बल के नाम भी बड़ी उपलब्धियां हैं। वर्ष 2008 से 2025 तक यानी कुल 18 वर्षों में इस बल से माओवादियों के 118 मुठभेड़ हुए हैं।

इस मुठभेड़ में झारखंड जगुआर ने 48 माओवादियों को ढेर कर दिया है। सर्वाधिक 18 माओवादियों को झारखंड जगुआर ने वर्ष 2025 में आठ मुठभेड़ में मारा है।

इस 18 साल के भीतर झारखंड जगुआर ने माओवादियों के पास से 19 एके-47, 27 इंसास, 33 एसएलआर, एक एमएमजी, सात एलएमजी, छह कार्बाइन, 303 राइफल 25, यानी कुल 151 हथियारों को बरामद किया।

माओवादियों के पास से इस बल ने 324 देसी हथियार व 21368 कारतूस की भी बरामदगी की। कुल 2177 आइईडी व 4855 किलोग्राम विस्फोटक व 133 हैंड ग्रेनेड को भी बरामद किया।

वर्ष 2011 से अब तक माओवादियों के पास से झारखंड जगुआर ने 56 लाख चार हजार 130 रुपये नकदी की बरामदगी भी की है।