मेदांता अस्पताल पहुंचे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह, लिया Sonam Wangchuk का हेल्थ अपडेट
Nadda Visit Medanta Hospital
नई दिल्ली: Nadda Visit Medanta Hospital: प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा मंगलवार रात एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की सेहत का हालचाल जानने के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल गए. दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद सफदरजंग हॉस्पिटल से गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में शिफ्ट किए जाने के बाद भी एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने मंगलवार को अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी.
वहीं पार्लियामेंट मार्च के दौरान हिंसक झड़पों के एक दिन बाद हजारों छात्र और समर्थक अपना आंदोलन फिर से शुरू करने के लिए जंतर-मंतर लौट आए. सोमवार को 'संसद चलो' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद, 5,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए और प्रदर्शन वाली जगह पर अपना कब्जा कर लिया.
आंदोलन को लीड कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ऑर्गनाइजर ने ऐलान किया कि विरोध अनिश्चित काल तक जारी रहेगा, लेकिन वे पार्लियामेंट की ओर आगे के मार्च रोक देंगे. उनका आरोप है कि सोमवार के प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले छात्रों को बहुत ज़्यादा पुलिस के बल का सामना करना पड़ा.
सूत्रों के मुताबिक, 'प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की सेहत का हालचाल जानने के लिए गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल गए.' वांगचुक, जिन्होंने 28 जून को अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था, विरोध में अब भी एक अहम चेहरा बने हुए हैं.
हालांकि उन्हें न्यायिक निगरानी में मेदांता हॉस्पिटल में ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने कन्फर्म किया कि वे पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर घायल हुए स्टूडेंट्स के साथ एकजुटता दिखाते हुए अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे.
इससे पहले मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने अंगमो की अर्जी पर सुनवाई के बाद वांगचुक को सफदरजंग हॉस्पिटल से तुरंत ट्रांसफर करने का निर्देश दिया था. चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की एक डिवीजन बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की यह बात मान ली कि केंद्र को ट्रांसफर पर कोई आपत्ति नहीं है और मेदांता हॉस्पिटल को वांगचुक के इलाज की निगरानी के लिए एक स्पेशल मेडिकल टीम बनाने का निर्देश दिया. कोर्ट ने एक्टिविस्ट को लगातार मेडिकल निगरानी में रहते हुए डॉक्टरों की दी गई मेडिकल सलाह मानने का भी निर्देश दिया.