तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक ने जेल के खाने पर उठाए सवाल, कोर्ट में रखी मांग

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American citizen Matthew Aaron VanDyke, currently lodged

नई दिल्ली। भारत की तिहाड़ जेल, जो बड़े से बड़े अपराधियों की अकड़ ठिकाने लगा देती है। इसी तिहाड़ में बंद अमेरिकी मर्सिनरी सैनिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइड ने जेल के खाने को लेकर सवाल उठाए हैं। इसके बाद से मैथ्यू एरॉन का नाम सुर्खियां में बना हुआ है।

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए, NIA) ने 13 मार्च 2026 को अमेरिकी मर्सिनरी सैनिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइड को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी कोलकाता एयरपोर्ट से की गई थी। मैथ्यू एरॉन के साथ ही छह यक्रेनी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया गया था।

कोई आम शख्स नहीं वैनडाइड

दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहा अमेरिकी मर्सिनरी सैनिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइड कोई आम शख्स नहीं है। वैनडाइड का एक खतरनाक किरदार बताया जाता है, जिसे अक्सर वार करने की लत है। उसे सीआईए का एसेट भी कहा जाता है।

मसालेदार बताया तिहाड़ जेल का खाना

अमेरिकी मर्सिनरी सैनिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइड ने मानवीय आधार का हवाला देते जेल के खाने पर सवाल उठाए। दावा किया कि जेल के खाने की वजह से उसे 50 दिन तक भूख हड़ताल पर रहना पड़ा। इसी दावे के चलते वह जेल में खाने के सामान के साथ बर्तन आदि की व्यवस्था चाहता है।

वैनडाइन ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज प्रशांत शर्मा के सामने अपनी समस्या रखकर यह मांग की है। कोर्ट को बताया कि जेल में मसालेदार और ऑयली, डीप-फ्राइड और चिकनाई वाला खाना मिलता है। कहा कि वह ऐसा खाना नहीं खा सकता है।

आतंकी साजिश और भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय उग्रवादी संगठनों को सैन्य प्रशिक्षण देने के आरोप में एनआईए ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद विशेष एनआईए अदालत ने वैनडाइड सहित सभी को UAPA के तहत 11 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा था। इसी मामले में वह सजा काट रहा है।

मैथ्यू वैनडाइक के बारे खास बातें 

जन्म और शिक्षा: 11 जून 1979 को मैरीलैंड, अमेरिका में जन्म हुआ। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, बाल्टीमोर काउंटी से पॉलिटिकल साइंस में बैचलर और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से सिक्योरिटी स्टडीज में मास्टर्स किया।

प्रारंभिक करियर: डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, युद्ध संवाददाता और मोटरसाइकिल से उत्तर अफ्रीका-मध्य पूर्व की यात्रा करने वाले यात्री के रूप में जाना जाता है। 2008-2011 के दौरान उन्होंने लीबिया, इराक, अफगानिस्तान आदि में फिल्में बनाईं।

लीबिया गृहयुद्ध (2011): लीबिया में गद्दाफी के खिलाफ विद्रोहियों के साथ लड़ते हुए शामिल हुआ। वह लीबिया में कैद रहा और छह महीने तक युद्धबंदी रहा। रिहाई के बाद वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चित हो गया।

क्या है आरोप?

पर्यटक वीजा पर भारत में प्रवेश कर मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में गए।
बिना परमिट के म्यांमार में अवैध प्रवेश।
भारत में प्रतिबंधित कुछ विद्रोही समूहों को हथियार, ड्रोन और सैन्य/ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण दिया।
यूरोप से बड़ी संख्या में ड्रोन भारत के रास्ते म्यांमार भेजे गए, जिनका इस्तेमाल सशस्त्र समूहों द्वारा किया जाना था।