पंजाब विधान सभा में पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ केंद्र सरकार द्वारा बदले जा रहे दर्जे के खि़लाफ़ प्रस्ताव पेश किया
पंजाब विधान सभा में पंजाब यूनिवर्सिटी

पंजाब विधान सभा में पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ केंद्र सरकार द्वारा बदले जा रहे दर्जे के खि़लाफ़ प्रस

पंजाब विधान सभा में पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ केंद्र सरकार द्वारा बदले जा रहे दर्जे के खि़लाफ़ प्रस्ताव पेश किया

चंडीगढ़। पंजाब विधान सभा में उच्च शिक्षा और भाषाओं संबंधी मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ केंद्र सरकार द्वारा बदले जा रहे दर्जे के खि़लाफ़ प्रस्ताव पेश किया, जिसको पंजाब विधान सभा ने पास करके यह मामला केंद्र 
जिसको पंजाब विधान सभा ने पास करके यह मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाने के लिए भेजा जाएगा। प्रस्ताव पर बोलते हुए उच्च शिक्षा मंत्री मीत हेयर ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत है और यह हमारे पंजाबियों की होंद का मामला है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पंजाब के हकों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, पंजाबी बोलने वाले इलाके और पानियों पर पंजाब का पूरा हक है।*

विधान सभा में उच्च शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर द्वारा पेश प्रस्ताव:-

यह सदन कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा किसी न किसी बहाने पंजाब यूनिवर्सिटी का दर्जा बदल कर केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने के मामले को आगे बढ़ाने के प्रयासों से चिंतित है।  
सदन इस बात को मानता है और मान्यता देता है कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब राज्य के एक एक्ट अर्थात पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947 के साथ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद फिर शुरू की गई थी और उसके उपरांत 1966 में पंजाब राज्य के पुनर्गठन के समय संसद द्वारा लागू किए गए पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 की धारा 72 (1) के अधीन इसको अंतर-राज्यीय संस्था घोषित किया गया था। अपनी स्थापना से लेकर, पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब राज्य में निरंतर और निर्विघ्न काम कर रही है। इसको पंजाब की उस समय की राजधानी लाहौर से होशियारपुर और फिर चंडीगढ़, पंजाब की राजधानी में तबदील कर दिया गया था। पंजाब के 175 से अधिक कॉलेज, जोकि फाजिल्का, फिऱोज़पुर, होशियारपुर, लुधियाना, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और एस.बी.एस. नगर जिलों में स्थित हैं, इस समय पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त हैं। समूचा क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र और आबादी, जिसको पंजाब यूनिवर्सिटी पूरा कर रही है, मुख्य तौर पर पंजाब राज्य में आती है, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के अधीन क्षेत्र के अलावा, जोकि पवित्र सदन के बहुत से प्रस्तावों के बाद भी केवल पंजाब राज्य की राजधानी के तौर पर बहाल नहीं किया गया और केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर चलता रहा है।  
ऐतिहासिक तौर पर, पंजाब के लोग इस यूनिवर्सिटी से शुरू से ही बहुत गहरे रूप से जुड़े हुए हैं और इस यूनिवर्सिटी की स्थापना के साथ ही अपनी पहचान बनाई है। पंजाब यूनिवर्सिटी ऐतिहासिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक कारणों से पंजाबियों के मन में एक भावनात्मक स्थान रखती है। यूनिवर्सिटी पंजाब की विरासत और विरासत के शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर इस हद तक उभरी है कि यह लगभग पंजाब राज्य का समानार्थक बन गई है।  
इस तथ्य के बावजूद कि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्यों ने यूनिवर्सिटी को रख-रखाव घाटे की ग्रांटों में अपना हिस्सा देना बंद कर दिया था, पंजाब राज्य ने अपना हिस्सा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है और 1976 से लगातार भुगतान किया जा रहा है। हरियाणा सरकार ने एकतरफ़ा रूप से यूनिवर्सिटी से अपने कॉलेजों की मान्यता वापस ले ली और इनको हरियाणा राज्य की अन्य यूनिवर्सिटियों में तबदील कर दिया, जिससे यूनिवर्सिटी की माली हालात में कमी आई है। भारत सरकार ने 27-10-1997 की अपने नोटिफिकेशन के द्वारा यूनिवर्सिटी की अलग-अलग गवर्निंग बॉडीज़ में से हरियाणा की नुमायंदगी ख़त्म कर दी थी।  
इस सदन ने देखा है कि यूनिवर्सिटी अपने वित्तीय मामलों का प्रबंधन और संचालन एकतरफ़ा ढंग से कर रही है। हालाँकि पंजाब राज्य ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान ग्रांट-इन-एड को 20 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 45.30 करोड़ रुपए कर दिया है, जोकि 75 प्रतिशत से अधिक वृद्धि है। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी द्वारा पंजाब में स्थित मान्यता प्राप्त कॉलेजों से लगभग 100 करोड़ रुपए सालाना एकत्रित किए जाते हैं। यह चोखी वृद्धि पंजाब यूनिवर्सिटी की ज़रूरतों के अनुकूल नहीं हो सकता, परन्तु ऐसा इस कारण हुआ है कि यहाँ कोई दोतरफा सलाह-मश्वरे की प्रक्रिया नहीं है।  
यह सदन दृढ़ता और सर्व-सहमति से महसूस करता है कि पंजाब यूनिवर्सिटी के रूप को बदलने का कोई भी फ़ैसला पंजाब के लोगों को स्वीकार नहीं होगा और इसलिए इस यूनिवर्सिटी के प्रकृति और चरित्र में किसी भी तरह की तबदीली भारत सरकार को नहीं करनी चाहिए। यदि कोई प्रस्ताव विचारा जा रहा है तो तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाना चाहिए।  
इसलिए यह सदन राज्य सरकार को पुरज़ोर सिफारश करता है कि वह उपरोक्त के अनुसार केंद्र सरकार के साथ मामला उठाए कि पंजाब के लोगों की भावनाओं को मुख्य रखते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी की प्रकृति और चरित्र में किसी भी तरह की तबदीली ना की जाए।