देश के बड़े सर्वे में उत्कृष्ट डीएम की श्रेणी में, सहरसा के डीएम दीपेश कुमार को मिली जगह
Saharsa DM Deepesh Kumar
पटना / बिहार : Saharsa DM Deepesh Kumar: फेम इंडिया मेगजीन और एशिया पोस्ट सर्वे ने संयुक्त रूप से देश के सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026 के सर्वेक्षण के प्रारंभिक नतीजे जारी कर दिये हैं। सर्वे में देश भर के करीब 800 जिले में कार्यरत अधिकारियों के काम काज का मुल्यांकन किया गया है। जिसके बाद लगभग 100 जिलाधिकारी और डिप्टी कमिश्नर को प्रारंभिक सूची में शामिल किया गया है। चयन प्रक्रिया का आधार प्रशासनिक क्षमता, जन्सम्पर्क, नवाचार, जवाबदेही और विकास कार्य जैसे दस मानकों को आधार बनाया गया है। सर्वे में विशेषज्ञों की राय, ग्राउंड रिपोर्ट और मीडिया विश्लेषण को भी शामिल किया गया है। इस सर्वेक्षण में बिहार के 38 जिले से मात्र 8 जिले के जिलाधिकारी को ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ये जिलाधिकारी हैं सहरसा के डीएम दीपेश कुमार, मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा, रोहतास की महिला डीएम उदिता सिंह, पटना के डीएम डॉक्टर त्यागराजन, सारण के वैभव श्रीवास्तव, सीवान के डीएम विवेक रंजन मैत्रेय, गयाजी के डीएम शशांक शुभंकर और मुजफ़्फ़रपुर के डीएम सुब्रत कुमार सेन। इस आलेख में हम सहरसा डीएम दीपेश कुमार की चर्चा कर रहे हैं कि उन्हें किन मापदंडों के जरिए, देश भर के इस महा सर्वे में जगह मिली है।
दीपेश कुमार : विकास, नवाचार और जनसरोकारों को समर्पित एक संवेदनशील प्रशासक
बिहार के अररिया ज़िले के बथनाहा में जन्मे दीपेश कुमार का जीवन प्रारंभ से ही विविध सामाजिक और प्रशासनिक अनुभवों से जुड़ा रहा। उनके पिता सिंचाई विभाग में अधिकारी थे, जिसके कारण उनका बचपन बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों में बीता। अलग- अलग क्षेत्रों की परिस्थितियों, ग्रामीण जीवन और प्रशासनिक चुनौतियों को निकट से देखने का अवसर उन्हें कम उम्र में ही मिला। यही अनुभव आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की संवेदनशीलता और प्रशासनिक दृष्टि की नींव बना।प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग क्षेत्र को चुना और प्रतिष्ठित दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में एम.टेक की उपाधि प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा के दौरान ही उन्होंने निर्माण कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और परियोजना प्रबंधन की गहरी समझ विकसित की। अपने पेशेवर जीवन में उत्कृष्ट सिविल कार्यों के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जो उनकी कार्यकुशलता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने से पहले दीपेश कुमार ने बिहार इंजीनियरिंग सेवा में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने सड़क, भवन और सार्वजनिक परियोजनाओं पर काम करते हुए शासन के व्यावहारिक पक्ष को नजदीक से समझा। 2017 बैच के आईएएस अधिकारी दीपेश कुमार ने आईएएस में आने के बाद मधुबनी में उप विकास आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दीं और कई विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना की निगरानी में उनकी कार्यशैली ने उन्हें एक परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में स्थापित किया। मधुबनी में उप विकास आयुक्त के पद से पदोन्नत होकर वर्तमान में सहरसा के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत दीपेश कुमार ने जिले के समग्र विकास को नई गति देने का प्रयास किया है। सहरसा कोसी नदी के पूर्वी तट पर स्थित, कोसी प्रमंडल का प्रशासनिक मुख्यालय है। एक ऐसा क्षेत्र जो ऐतिहासिक रूप से बाढ़ और कमजोर संपर्क व्यवस्था की समस्याओं से जूझता रहा है। इसी चुनौतीपूर्ण भौगोलिक और सामाजिक परिवेश में दीपेश कुमार ने अपने कार्यकाल में वर्षों से लंबित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया। क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेलवे ओवरब्रिज परियोजना की शुरुआत कराई गई। साथ ही सहरसा-मधेपुरा और सहरसा- सुपौल सड़क परियोजनाओं में तेजी लाई गई। बाढ़ के कारण पुल बह जाने की समस्या, इस क्षेत्र की कमजोर संपर्क व्यवस्था का प्रमुख कारण रही है। इसलिए कोसी नदी पर डेंगराही पुल निर्माण कार्य की शुरुआत को, यहाँ के लोग एक ऐतिहासिक कदम मानते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने कई नवाचारी पहल से लोगों को चौंकाया। सरकारी विद्यालयों में साप्ताहिक मूल्यांकन परीक्षा की व्यवस्था लागू की गई, ताकि विद्यार्थियों की नियमित शैक्षणिक प्रगति सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही विद्यालयों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए, अंतिम पीरियड को खेलकूद के लिए आरक्षित किया गया। यह पहल इतनी प्रभावी रही कि बाद में बिहार सरकार ने इसे राज्य स्तर पर अपनाया। यह दर्शाता है कि उनकी सोच केवल प्रशासनिक नियंत्रण तक सीमित नहीं बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास पर केंद्रित है। महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए पतरघट, सलखुआ और सिमरी बख्तियारपुर जैसे क्षेत्रों में जीविका वेंडिंग ज़ोन स्थापित किए गए। इन केंद्रों ने ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मंच दिया। सहरसा में मखाना क्लस्टर विकास के लिए भी राज्य सरकार ने लगभग 2.34 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिससे इस क्षेत्र की महिलाओं और किसानों को एक और आर्थिक अवसर मिलने की संभावना है। यही नही सिलाई केंद्रों की स्थापना कर के भी, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया।स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कायाकल्प पहल के अंतर्गत अस्पतालों की आधारभूत संरचना, स्वच्छता और बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन में व्यापक सुधार किए गए। इन प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि सहरसा सदर अस्पताल बिहार के बेहतर अस्पतालों में शामिल हुआ और उसे वित्तीय प्रोत्साहन सहित राज्य स्तरीय सम्मान भी प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशासनिक सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। शहरी विकास और पर्यटन के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। बिहार सरकार ने सहरसा जिले में मत्स्यगंधा झील और उसके निकट पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 98 करोड़ से अधिक की प्रशासनिक स्वीकृति दी है, जिसे इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं की सरकारी स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। जिले में कई नए पार्कों का निर्माण कराया गया तथा 8वीं शताब्दी के महान दार्शनिक पंडित मंदन मिश्र के जन्मस्थान के रूप में विख्यात मंडन धाम के पुनर्जीवन की दिशा में भी सार्थक पहल की गई। यह वही ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ लगभग बारह सौ वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य और पंडित मंदन मिश्र के बीच महान शास्त्रार्थ हुआ था। अब इसे एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में, विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला स्टेडियम के आधुनिकीकरण का कार्य भी आगे बढ़ाया गया, ताकि युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें।
दीपेश कुमार की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता उनकी जनकेंद्रित सोच और परिणाम आधारित प्रशासन है। वे केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहते बल्कि उनके धरातलीय क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देते हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि होने के कारण वे परियोजनाओं की गुणवत्ता, समयबद्धता और प्रभावशीलता को गंभीरता से लेते हैं। यही कारण है कि उनके नेतृत्व में कई योजनाएं अपेक्षाकृत तेजी से आगे बढ़ीं।
एक प्रशासक के रूप में उनकी पहचान ऐसे अधिकारी की है जो विकास, नवाचार और संवेदनशील प्रशासन के संतुलन को समझते हैं। वे मानते हैं कि प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसी सोच के साथ वे सहरसा को बिहार के एक मॉडल जिले के रूप में, विकसित करने की दिशा में लगातार कार्यरत हैं। आज दीपेश कुमार उन युवा प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाते हैं जो आधुनिक सोच, तकनीकी समझ और मानवीय दृष्टिकोण के साथ शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनोन्मुख बनाने का प्रयास कर रहे हैं।