मानव रचना में 2,150 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान; केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23 होने का उल्लेख किया

मानव रचना में 2,150 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान; केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23 होने का उल्लेख किया

Human Rachna University Awarded Degrees to 2,150 Students

Human Rachna University Awarded Degrees to 2,150 Students

फरीदाबाद। दयाराम वशिष्ठ: Human Rachna University Awarded Degrees to 2,150 Students: मानव रचना विश्वविद्यालय (एमआरयू) तथा मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज़ (एमआरआईआईआरएस) का दीक्षांत समारोह 2025–26 शैक्षणिक उपलब्धियों का एक महत्वपूर्ण अवसर रहा, जिसमें स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध कार्यक्रमों के अंतर्गत कुल 2,150 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। मानव रचना परिसर में आयोजित इस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

दीक्षांत समारोह का उद्घाटन मानव रचना शैक्षणिक संस्थानों की मुख्य संरक्षक श्रीमती सत्या भल्ला द्वारा किया गया। इस अवसर पर मानव रचना शैक्षणिक संस्थानों के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत भल्ला एवं उपाध्यक्ष डॉ. अमित भल्ला विशेष रूप से उपस्थित रहे। मानव रचना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दीपेंद्र कुमार झा तथा मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज़ के कुलपति डॉ. संजय श्रीवास्तव ने अपने-अपने संस्थानों की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में शिक्षकगण, अभिभावक तथा उत्तीर्ण विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Human Rachna University Awarded Degrees to 2,150 Students

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जे.पी. नड्डा ने कहा, “मुझे यह देखकर प्रसन्नता है कि आपने अपने संस्थान का नाम ‘मानव रचना’ रखा है। यह इस बात का संकेत है कि यहां केवल शैक्षणिक ज्ञान नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से युक्त व्यक्तित्व के निर्माण पर बल दिया जाता है। आज आप ऐसे समय में समाज में प्रवेश कर रहे हैं जब देश अमृत काल के दूसरे चरण में है और आने वाले 25 वर्ष आपकी भूमिका से तय होंगे। यह अवसर जितना बड़ा है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है, क्योंकि 2047 तक हमें मिलकर एक विकसित भारत का निर्माण करना है। इस यात्रा में स्वास्थ्य, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और नवाचार की अहम भूमिका होगी और मुझे विश्वास है कि आज की युवा पीढ़ी इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाएगी।”

भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र और राष्ट्रीय विकास की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले 11 वर्षों में भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है। संस्थागत प्रसव 78 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट वैश्विक औसत की तुलना में लगभग तीन गुना तेज़ रही है। तपेदिक और मलेरिया जैसी बीमारियों में भी भारत की प्रगति वैश्विक प्रवृत्तियों से बेहतर रही है। लोगों पर पड़ने वाला स्वास्थ्य खर्च 62 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत रह गया है, जिससे आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती बनी हैं। इसी अवधि में देश में स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा अवसंरचना का भी विस्तार हुआ है, जहां एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23, आईआईटी 33 और आईआईएम 20 से अधिक हो गए हैं। ये संस्थान उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सृजित कर रहे हैं। लेकिन परिवर्तन स्वयं नहीं आएगा, इसका नेतृत्व आपको करना होगा।”

मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज़ (एमआरआईआईआरएस) द्वारा माल्टा गणराज्य के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश तथा पर्यटन मंत्री महामहिम डॉ. इयान बॉर्ग को सार्वजनिक सेवा, वैश्विक कूटनीति और शांति के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (मानद) उपाधि प्रदान की गई। इसी प्रकार, बिहार सरकार की खेल एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रीमती श्रेयसी सिंह को खेल, सार्वजनिक जीवन और युवा सशक्तिकरण में योगदान के लिए तथा भारतीय चिकित्सा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक को चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा और व्यावसायिक नेतृत्व में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

मानव रचना विश्वविद्यालय (एमआरयू) द्वारा जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल को न्याय व्यवस्था, न्यायिक सुधारों तथा मानव गरिमा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (मानद) उपाधि प्रदान की गई।

डॉ. प्रशांत भल्ला, अध्यक्ष, मानव रचना शैक्षणिक संस्थान, ने कहा, “दीक्षांत समारोह आत्ममंथन का क्षण होता है, जब समाज स्नातकों पर अधिक जिम्मेदारी के साथ भरोसा जताता है। आप ऐसे समय में स्नातक हो रहे हैं जो देश के लिए निर्णायक है, क्योंकि विकसित भारत की यात्रा केवल नीतियों, ढांचे या तकनीक से नहीं, बल्कि लोगों की क्षमता, अंतरात्मा और साहस से तय होगी। आज की दुनिया सिर्फ डिग्री को नहीं, बल्कि सही निर्णय, ईमानदारी और जिम्मेदार आचरण को महत्व देती है। मैं हमारे माननीय मुख्य अतिथि श्री जे.पी. नड्डा के प्रति गहरा आभार व्यक्त करता हूँ, जिनका सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने, सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और जन-केंद्रित राष्ट्रीय पहलों में योगदान उद्देश्यपूर्ण शासन का उदाहरण है। उनकी उपस्थिति हमारे विद्यार्थियों को यह संदेश देती है कि सच्चा नेतृत्व केवल अधिकार से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, सेवा और नैतिक स्पष्टता से परखा जाता है। मैं स्नातकों से आग्रह करता हूँ कि वे केवल सफलता नहीं, बल्कि सार्थकता की तलाश करें और महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता तथा उत्कृष्टता के साथ सेवा का संतुलन बनाए रखें।”

डॉ. अमित भल्ला, उपाध्यक्ष, मानव रचना शैक्षणिक संस्थान, ने कहा, “आज आप ऐसे दौर में कदम रख रहे हैं जहाँ दुनिया तकनीक, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों से मिलकर आगे बढ़ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार की उपलब्धियाँ तब बेकार हो जाती हैं, जब उनसे असमानता बढ़े या प्रकृति को नुकसान पहुँचे। उसी तरह, खेलों में जीत भी ईमानदारी और टीम भावना के बिना कोई मायने नहीं रखती। मानव रचना में हमने हमेशा यह प्रयास किया है कि नवाचार के साथ जिम्मेदारी, प्रदर्शन के साथ चरित्र और महत्वाकांक्षा के साथ टिकाऊ सोच को जोड़ा जाए। आगे बढ़ते हुए, आपकी सफलता इस बात से जानी जाए कि आप क्या बनाते हैं, कैसे प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने आसपास की दुनिया की कितनी परवाह करते हैं।”

दीक्षांत समारोह 2025–26 के दौरान एमआरआईआईआरएस ने 1,069 स्नातक, 404 स्नातकोत्तर और 87 शोध उपाधियाँ प्रदान कीं, साथ ही 66 पदक एवं पुरस्कार मेधावी विद्यार्थियों को दिए गए। वहीं, मानव रचना विश्वविद्यालय (एमआरयू) द्वारा 521 स्नातक, 58 स्नातकोत्तर और 11 शोध उपाधियाँ प्रदान की गईं।
यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा के औपचारिक समापन के साथ-साथ मानव रचना के उस शैक्षणिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसका उद्देश्य ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों का निर्माण करना है।