HPSC exam results shatter dreams, village girl sits on protest in Panchkula

HPSC परीक्षा परिणाम से टूटा सपना, पंचकूला में धरने पर बैठी है गांव की बेटी

HPSC exam results shatter dreams

HPSC exam results shatter dreams, village girl sits on protest in Panchkula

हरियाणा के अंतिम छोर पर बसे मोरका गांव का एक छोटा किसान जब अपनी बेटी को चूल्हा-चौका छोड़कर उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजता है, तो उसके मन में बड़े सपने होते हैं। लेकिन जब वही पिता टूटे मन से कहता है—
“घर नै आज्या… बहोत पढ़ ली, इब तेरा ब्याह करांगे।”
तो यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक पूरे सपने का टूटना होता है।

यह कहानी है मोनिका की—एक ग्रामीण बेटी, जिसने 6 बार NET परीक्षा पास की, अंग्रेज़ी में पोस्ट ग्रेजुएशन फर्स्ट डिविजन से की, कई राज्यों की प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं, लेकिन फिर भी हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में बाहर कर दी गई।

HPSC के फैसले से टूटा सपना

मोनिका उन सैकड़ों अभ्यर्थियों में शामिल है जिन्हें HPSC द्वारा आयोजित 613 अंग्रेज़ी असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की भर्ती प्रक्रिया में SKT परीक्षा में 35% का क्राइटेरिया लागू कर बाहर कर दिया गया।
613 पदों के मुकाबले आयोग ने केवल 151 अभ्यर्थियों को ही मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया, जिससे बड़ी संख्या में NET-क्वालिफाइड उम्मीदवारों के सपने टूट गए।

गांव से यूनिवर्सिटी तक का सफर

मोनिका बताती हैं कि—

  • प्रारंभिक शिक्षा गांव मोरका से

  • 10वीं-12वीं की पढ़ाई मीठी गांव से

  • ग्रेजुएशन बहल कॉलेज से

  • अंग्रेज़ी में एम.ए. महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से (फर्स्ट क्लास)

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा—

  • 6 बार UGC-NET क्वालिफाई

  • UPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा पास (इंटरव्यू बाकी)

  • RPSC असिस्टेंट प्रोफेसर मेन्स पास, इंटरव्यू के बाद मेरिट से बाहर

  • DSSSB की PGT परीक्षा पास

आर्थिक हालात और सामाजिक दबाव

मोनिका का परिवार केवल 3 एकड़ जमीन पर निर्भर है। पिता दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर परिवार का गुज़ारा करते हैं। जब HPSC के परिणाम आए और इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को फेल कर दिया गया, तो पिता भावुक हो गए और वही बात कह दी, जिससे मोनिका टूट गई।

पंचकूला में धरना, अभी भी उम्मीद जिंदा

इन हालातों के बावजूद मोनिका ने हार नहीं मानी। वह अपने गांव से 300 किलोमीटर दूर पंचकूला आकर पिछले एक सप्ताह से HPSC के फैसले के खिलाफ धरने पर बैठी हैं।
उन्हें अब भी उम्मीद है कि—

  • HPSC पुनर्विचार करेगा, या

  • हरियाणा सरकार हस्तक्षेप करेगी, या

  • पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से उन्हें न्याय मिलेगा।

मोनिका कहती हैं,
“यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं है, यह हर उस बेटी की है जिसने गांव से निकलकर पढ़ाई की और सिस्टम से हार गई। मैं आखिरी सांस तक यह लड़ाई लड़ूंगी।”

सवाल सिस्टम पर

यह मामला केवल एक अभ्यर्थी का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो योग्यता के बावजूद अवसर के दरवाजे बंद कर देती है। जब एक ग्रामीण बेटी 6 बार NET पास कर भी नौकरी से बाहर हो जाए, तो यह केवल व्यक्तिगत असफलता नहीं, बल्कि नीतिगत विफलता बन जाती है।