कोर कमेटी की मीटिंग में हुआ राजनैतिक भागीदारी पर विचार विमर्श

कोर कमेटी की मीटिंग में हुआ राजनैतिक भागीदारी पर विचार विमर्श

कोर कमेटी की मीटिंग में हुआ राजनैतिक भागीदारी पर विचार विमर्श

जनगणना के समय जाति वाले कॉलम में गोत्र की जगह लिखे जैन- अजित प्रसाद 

यमुनानगर, 24 नवम्बर :

भारतीय जैन की क्षेत्र संख्या-7 की कोर कमेटी की मीटिंग का आयोजन ऑनलाईन किया गया। जिसमें राजनैतिक भागीदारी जनजागरण अभियान के बारे में विचार विमर्श किया गया। मीटिंग की अध्यक्षता राष्ट्रीय मंत्री जय कुमार जै ने की तथा संचालन क्षेत्रीय अध्यक्ष एडवोकेट एस. के. जैन ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में रेवाड़ी से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजित प्रसाद जैन, सोनीपत से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनोद जैन ने भाग लिया। बैैठक का शुभाारम्भ णमोकार महामंत्र के गुंजन से किया गया। जय कुमार जैन ने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार सभी राजनैतिक पार्टियां सभी धर्मों के आधार पर अपने प्रत्याशियों को टिकट देकर चुनाव में खड़ा करते है उसी प्रकार जैन धर्म के प्रत्याशियों को भी स्थान दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि भारत की पहली संसद में 44 सांसद जैन थे, लेकिन आज के समय में कोई भी पार्टी जैन समाज को राजनिती में उचित भागीदारी नहीं दे रही है। इसके परिणाम स्वरूप संसद में एक भी जैन सांसद नहीं है। उन्होंने जोर देते हुये कहा कि अब समय आ गया है कि इसके लिये जैन समाज को संगठित होना चाहिये और अपनी आवाज़ भागीदारी लेने के लिये बुलंद करना चाहिये। अजित प्रसाद जैन ने संबोधित करते हुये कहा कि हमें आने वाले चुनाव में अपने संख्या को बढ़ाना चाहिये। इसके लिये किसी भी सभ्यता, संस्कृति व समाज धर्म के अस्तित्व की रक्षा के लिये और उसको पालन करने वाले की संख्या अधिक होना आवश्यक है। अब समय आ गया है कि जैन समाज को सभी मतभेद भुला कर अपने वज़ूद की रक्षा करने के लिये अपनी जन संख्या बढ़ाने पर गम्भीरता से विचार करना चाहिये। विनोद जैन ने बताया कि यह बाद विचारणीय है कि भारत में जैन सदस्यों की आबादी लगभग 2 करोड़ है, लेकिन जन गणना के अनुसार भारत में लगभग 50 लाख ही जैन सदस्य है। इसका मुख्य कारण जन गणना के समय जैन सदस्य अपनी जाति के कॉलम में जैन न लिख कर गोत्र लिख देते है, जिस कारण उनकी गितती जैन सदस्यों में नहीं होती है। वरिष्ठ क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आर. के. जैन ने कहा कि जैन परिवारों घटती संख्या पर कार्य किया जाना चाहिये। जब जन गणना हो तो जाति और धर्मा के कॉलम में केवल जैन लिखे। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में जैन धर्म के संस्कार इतनी दृढ़ता से बनाये और समाज में सम्मान दे की वह अपने समाज से जुड़े रहे। उन्होंने सुझाव देते हुये कहा कि हमें एक सर्वे करना चाहिये कि कितने जैन सदस्य राजनीति में रूची रखते है और कहां-कहां के व्यक्तियों में यह योग्याता पाई जाती है, कितनी व्यक्ति ऐसे है जो चुनाव प्रकिृया के लिये सक्षम है, और किसी पार्टी में अपना स्थान बनाते है।


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