गैर जमानती वारंट मामले में हाईकोर्ट सख्त, एसपी से मांगा स्पष्टीकरण

गैर जमानती वारंट मामले में हाईकोर्ट सख्त, एसपी से मांगा स्पष्टीकरण

High Court Takes Strict Stance in Non-Bailable Warrant Case

High Court Takes Strict Stance in Non-Bailable Warrant Case

प्रयागराज। High Court Takes Strict Stance in Non-Bailable Warrant Case, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना किसी ठोस वजह अदालत से अभियुक्त के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराने वाले विवेचना अधिकारी को निलंबित किए जाने के मामले में बस्ती के पुलिस अधीक्षक का हलफनामा असंतोषजनक बताते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। कहा है कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने की दशा में पुलिस अधीक्षक के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जा सकती है।

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथाग न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने रत्नेश कुमार उर्फ राजू शुक्ला की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। इस प्रकरण में अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।

विवेचना अधिकारी के निलंबन मामले में एसपी के हलफनामे से कोर्ट असंतुष्ट

कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 के आदेश में पूछा था कि वाल्टरगंज थाने के विवेचना अधिकारी राधेश्याम त्रिपाठी को सत्येन्द्र शुक्ला उर्फ जिप्पी, धर्मेंद्र शुक्ला,जीतेन्द्र शुक्ला, गिरजेश शुक्ला, मनीष शुक्ला,अवनीश शुक्ला व देवेन्द्र शुक्ला की उपस्थिति के लिए अदालत से गैर जमानती वारंट प्राप्त करने की प्रार्थना पर एसपी ने क्यों निलंबित कर दिया?

बस्ती के पुलिस अधीक्षक से दोबारा मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

याची ने अनुपूरक हलफनामा में यह तथ्य उल्लेखित किया है कि अदालत से एनबीडब्ल्यू जारी करवाने वाले विवेचना अधिकारी को निलंबित किया गया है। गैर-जमानती वारंट अदालत द्वारा मामले की डायरी की समीक्षा के बाद जारी किया जाता है, न कि केवल विवेचना अधिकारी की बात पर।

पुलिस अधीक्षक ने ऐसा कर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय की अदालत की अवमानना की है। जिन्होंने विवेचना अधिकारी के आवेदन पर गैर-जमानती वारंट जारी किया था। याची के अनुसार वारंट जारी करने का अधिकार अदालत का है। इसमें पुलिस अधीक्षक की राय महत्व नहीं रखती।