बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव पर. फायररिंग का मामला : हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच का विकल्प खुला रखा, पूछा, "मोटरसाइकिल भी नहीं मिला?"
Firing case against former Bar Association secretary
अदालती परिसर की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सख्त टिप्पणियां, वकीलों से सहयोग की अपील
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने वीरवार को हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव गगनदीप जम्मू पर हुई फायररिंग की घटना की पंजाब पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि इस समय केस को सीबीआई को ट्रांसफर करने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन यदि जांच एजेंसियां प्रभावी कार्रवाई करने में असफल रहती हैं तो अदालत इस विकल्प पर विचार कर सकती है।
डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को 25 मई तक नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई पर जांच की प्रगति का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा और यदि जरूरत पड़ी तो उचित आदेश दिए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ यूटी ने कहा कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात हमलावरों को जल्द गिरफ्तार करना है। सुरक्षा बढ़ाना एक पहलू है, लेकिन आरोपियों तक पहुंचना मुख्य चिंता है। इस दौरान बार एसोसिएशन के प्रधान रोहित सूद ने अदालत को बताया कि पंजाब में गैंगस्टर कल्चर गंभीर हो चुका है। उन्होंने कहा कि अपराधी अपने अपराधों को अंजाम देने के बाद इंटरनेट पर खुलेआम प्रचार कर रहे हैं। ऐसे मामलों में सीबीआई जांच एक उचित कदम हो सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की धीमी प्रगति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा कि घटना में इस्तेमाल किया गया मोटरसाइकिल अब तक क्यों नहीं मिला। अदालत ने पूछा, "क्या मोटरसाइकिल भी नहीं मिला?" जब पुलिस ने बताया कि कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं हुई है, तो डिवीजन बेंच ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया।
अदालत ने सीसीटीवी फुटेज मीडिया में लीक होने पर भी चिंता जताई। बेंच ने कहा कि जांच जारी रहने के दौरान ऐसी फुटेज सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए और पुलिस को इसे मीडिया के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
गौरतलब है कि गगनदीप जम्मू पर 18 मई को रात करीब 8:15 बजे पंजाब में अपनी कार में यात्रा करते समय हमला किया गया था। शिकायत के अनुसार मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात हमलावरों ने पीछे से आकर उनकी गाड़ी पर गोलियां चलाईं। गोलियां गाड़ी को लगीं, लेकिन वह बाल-बाल बच गए। मोहाली पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा केवल गोलीबारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हाई कोर्ट परिसर के अंदर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। अदालत ने नोट किया कि बाहरी लोग आसानी से परिसर में प्रवेश कर जाते हैं और पुलिस अक्सर वकीलों से जुड़े विवादों में हस्तक्षेप करने से हिचकिचाती है। अदालत ने वकीलों से सुरक्षा जांच में सहयोग करने की अपील की और कहा कि तलाशी का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।
चंडीगढ़ प्रशासन के वकील ने सुरक्षा के लिए तकनीकी सुधारों का सुझाव दिया, जिसमें प्रॉक्सिमिटी कार्ड, डिजिटल पास, मेटल डिटेक्टर इंटीग्रेशन और फेस रिकग्निशन आधारित एंट्री सिस्टम लागू करने की वकालत की गई। अदालत ने बार एसोसिएशन को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर पेश करने के निर्देश दिए, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके।