जमशेदपुर के आसमान में फाइटर जेट की गूंज, लो फ्लाइंग ट्रेनिंग से दहशत और उत्सुकता
Fighter Jets Roar Across Jamshedpur Skies
जमशेदपुर। Fighter Jets Roar Across Jamshedpur Skies, लौहनगरी जमशेदपुर के आसमान में गुरुवार सुबह अचानक तेज गर्जना हुई। शहरवासी कुछ समझ पाते तब तक एक के बाद एक, दो फाइटर जेट लो फ्लाइंग करते हुए आसमान में गुम हो गए।
आवाज सुनकर क्या बच्चे और क्या बड़े, सभी अपनी छतों की भागे ताकि फाइटर जेट की एक झलक पा सके। हालांकि जब तक वे अपनी छत तक भी पहुंच पाते, फाइटर जेट की केवल आवाज सुनाई दी, संभवत: किसी को दिखाई दी हो और दोनों फाइटर जेट जमशेदपुर के हवाई क्षेत्र से गायब हो गए।
यह वाक्या हुआ सुबह लगभग 11 बजकर 25 मिनट पर। इसके बाद शहरवासियों में यह चर्चा आम हो गई कि जमशेदपुर जैसे शहर में आखिर फाइटर जेट क्यों उड़ रहे हैं। लेकिन शहरवासियों को शायद याद नहीं या देर रात जो जग रहे थे उन्हें याद हो कि छह व सात मई 2025 को हुए ऑपरेशन सिंदूर के समय भी ऐसा ही तेज गर्जना करते हुए फाइटर जेट ने शहर के ऊपर से उड़ान भरी थी। तब वह रात का समय था। रात लगभग एक बजे जब सभी शहरवासी गहरी नींद में थे, तब ऐसी ही तेज गर्जना के साथ फाइटर जेट ने उड़ान भरी थी।
कलाईकुंडा से फाइटर जेट ने भरी थी उड़ान
प्राप्त जानकारी के अनुसार दो फाइटर जेट पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरबेस से उड़ान भरी थी। जो एक तरह के टेक्टिकल ट्रेनिंग सार्टी थी। इसमें फाइटर जेट लो फ्लाइंग करते हुए उड़ान भरते हैं।
टेक्टिकल ट्रेनिंग सार्टी में आमतौर पर यह ऊंचाई 250 से 500 फीट यानि 75 से 150 मीटर तक हो सकती है लेकिन अल्ट्रा लो फ्लाइंग जैसी विशेष परिस्थिति में टेक्टिकल ट्रेनिंग एरिया में फाइटर जेट 100 फीट यानि 30 मीटर तक भी नीचे से उड़ सकते हैं।
लो फ्लाइंग करने की क्या है वजह
फाइटर जेट को लो फ्लाइंग करने का मुख्य उद्देश्य रडार को चकमा देना होता है यानि नेप आफ द अर्थ फ्लाइंग। इसमें फाइटर जेट के पायलट 50 फीट या इससे कम ऊंचाई पर भी उड़ने का अभ्यास करते हैं।
जमीन के करीब उडने से दुश्मन के रडार विमान को पहाड़ों और पेड़ों की ओट में होने के कारण पहचान नहीं पाते हैं। इस दौरान जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर अचूक निशाना लगाने के लिए कम ऊंचाई पर उड़ना जरूरी होता है। इसके अलावा सरप्राइज फैक्टर भी काम करता है। कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ने से दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलता है।
इस दौरान फाइटर जेट की आवाज 130 से 150 डेसिबल तक होती है जो एक एंबुलेंस के सायरन से भी अधिक होती है। वहीं, यदि जेट सुपरसोनिक गति (आवाज की गति से तेज) पर है तो यह सोनिक बूम पैदा करता है जो एक धमाके जैसा महसूस होता है।
सोनारी एयरपोर्ट को दी गई थी सूचना
टाटा स्टील के एविएशन चीफ रवि राधाकृष्णन ने बताया कि कलाइकुंडा एयरबेस से वायुसेना की यह एक नियमित उड़ान थी। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों ने कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के प्रशिक्षण के बारे में उड़ानें भरने से पहले हमें पहले ही सूचित कर दिया था।