Wednesday, September 18, 2019
Breaking News
Home » संपादकीय » जहरीली शराब ने मचाई तबाही

जहरीली शराब ने मचाई तबाही

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहरीली शराब के सेवन से 124 लोगों की मौत ने कोहराम मचा दिया है। सुशासन का दावा करने वाली सरकारों के तहत ऐसा होना हैरान करने वाला है, वहीं पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। इस तरह के कांड अब आम बात हो गए हैं, बावजूद इसके सरकारी तंत्र को ऐसी अवैध शराब बनाने की फैक्टरियों की सूचना नहीं मिलना चिंताजनक बात है। हालांकि हादसे के बाद चैंकी उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया है, जिसे अगले 10 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस बीच सहारनपुर में 33 आरोपियों को काबू किया जा चुका है, इन पर जहरीली शराब बेचने का आरोप है। बताया गया है कि सहारनपुर जिले के एक गांव में यह जहरीली शराब तैयार की गई। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों के साथ तो यह हादसा बीता ही, उसी रोज उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा के पास पडऩे वाले कस्बे कुशीनगर में भी ऐसी घटना घटी।

यह हादसा इसका उदाहरण है कि समय रहते प्रशासन हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहता है और जैसे ही कोई हादसा घटता है तो उसकी तह तक जाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया जाता है। अभी माहौल चुनाव का बन रहा है, और दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, इसलिए पार्टी हाईकमान की ओर से भी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का दबाव बन रहा होगा। योगी सरकार ने एसआईटी के अलावा जिलों में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ अभियान भी शुरू कर दिया है। हालांकि यह निश्चित नहीं है कि ऐसा अभियान कब तक जारी रहेगा, क्योंकि उत्तरप्रदेश और आसपास के राज्यों में सस्ती, कच्ची शराब बनाकर मुनाफा कमाने वाले बहुत लोग हैं। आरोप यह भी लगता है कि ये पुलिस तंत्र की ढील का फायदा उठाते हुए ऐसा करते हैं। वैसे अस्पतालों में पड़े या दम तोड़ चुके लोगों के परिजनों के सवाल कभी खत्म नहीं होंगे आखिर ऐसा हो कैसे जाता है? बताया गया है कि एक सामाजिक समारोह के दौरान यह जहरीली शराब परोसी गई थी। देश में मोदी सरकार जब गरीब और जरूरतमंद की पैरोकार बनकर खड़ी हो रही है, तब ऐसे हादसे होना शासनतंत्र में खामी को उजागर करते हैं। कच्ची और जहरीली शराब बनाना और उसे बेचना मौत को अपने नजदीक बैठा कर रखना है।

शराब का जनमानस से गहरा संबंध है, मध्यमवर्गीय आदमी बेशक किसी बेहतर कंपनी की शराब खरीदकर पी ले, लेकिन समाज का ऐसा वर्ग अभी भी है जोकि इसका शौक तो रखता है लेकिन जिसे पूरा करने के लिए उसकी जेब मोहलत नहीं देती। ऐसे में वे गुनाहगार काम आते हैं, जोकि चोरी-छिपे जहरीली शराब बनाते और बेचते हैं। हरियाणा जैसे प्रदेश में एक सरकार इसी शर्त पर बन चुकी है कि वह प्रदेश में शराबबंदी लागू करेगी। हालांकि उस सरकार की बदनसीबी थी कि शराबबंदी करके वह खुद बंद हो गई। अब कोई भी पार्टी ऐसा दावा करने का जोखिम नहीं लेती कि वह शराबबंदी करवा देगी। देखने में यह भी आया है कि शराबबंदी से अवैध शराब की बिक्री ही बढ़ जाती है वहीं सरकार को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ता है। गुजरात और बिहार जैसे राज्य शराबबंदी के नाम पर पुलिस की सख्ती करके इसे पूरी तरह बंद कर देने की खुशफहमी में हैंए जबकि जिन राज्यों में इसे गैरकानूनी घोषित नहीं किया गया हैए वहां आधिकाधिक टैक्स के जरिए इसे ज्यादा से ज्यादा महंगी करने का रुझान देखा जा रहा है।

दरअसल, शराब का सेवन किया जाए या नहीं, यह सामाजिक सवाल भी है, मेडिकल साइंस भी इसके दायरे में आती है, कानून और शासनतंत्र का दखल भी इसके लिए चाहिए होता है। आज के समय में शराबबंदी संभव नहीं है, हालांकि इसकी जरूरत हमेशा समझी जाती है। गांव-देहात में महिलाएं उन राजनीतिक प्रतिनिधियों के सामने रोना रोती रहती हैं, जोकि उनके पास वोट के लिए पहुंचते हैं। वे कहती हैं कि हमारे परिजनों को शराब की लत से बचाओ, हमारे गांव में शराब के ठेके बंद कराओ आदि। हालांकि उनकी यह मांग अनसुनी ही रह जाती है। सरकारी तंत्र को ऐसे में रास्ता निकालने की जरूरत है। इसका समर्थन नहीं किया जा सकता है कि शराब का सेवन किया जाए लेकिन अवैध और जहरीली शराब के बनाने और बेचने को सख्ती से बंद कराया जा सकता है।

Check Also

यातायात कानून में संशोधन वक्त की मांग

किसी हादसे में घायल होने या मौत होने के बाद अक्सर कहा जाता है, काश! …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel