ट्रंप और इजरायल PM नेतन्याहू में बहस? अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में साफ की तस्वीर, ईरान पर लगाया यह बड़ा आरोप, पढ़ें
Donald Trump-Netanyahu Dispute During Iran War Latest News
Trump-Netanyahu Dispute: मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से जंगी मैदान में हैं और एकसाथ ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल PM बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बहस और झगड़े की खबर सामने आई है। हालांकि इस बारे में जब ट्रंप से बातचीत की गई तो उन्होंने इसे साफ नकार दिया और कहा कि इजरायल के साथ उनका रिश्ता अच्छा है, वह एक और फेक न्यूज़ थी। नेतन्याहू के साथ मेरी कभी कोई बहस नहीं हुई। ट्रंप ने कहा कि हम सच में अच्छे से मिलते हैं, और हम पूरी चीज़ को लीड कर रहे हैं। नेतन्याहू के साथ मेरा रिश्ता, मैं कहूंगा, बहुत अच्छा है।
ईरान FAKE खबरें फैला रहा
वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर FAKE खबरें फैलाने का आरोप लगाया है और साथ ही वह मीडिया संस्थानों पर भी भड़के हैं। ईरान द्वारा सीज़फ़ायर की मांग के उनके दावे को खारिज करने की खबरों पर ट्रंप ने कहा, वे जनता को यह कभी नहीं बताएंगे लेकिन मैंने उनकी गलत जानकारी के बारे में सच सामने रखा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने कहा था कि उन्होंने USS Abraham Lincoln (CVN-72) पर हमला किया, मगर उस पर कभी हमला नहीं हुआ। वह कभी जल नहीं रहा था। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान मीडिया के जरिये फेक न्यूज और AI के जरिए फर्जी युद्ध प्रचार फैला रहा है, और इसमें उसका साथ उनके ही देश के कुछ मीडिया संस्थान भी दे रहे हैं।
ट्रंप ने कहा युद्ध शुरू करने से पहले उन्हें इसका एहसास नहीं था, लेकिन ईरान बहुत सारी फेक न्यूज़ के लिए जाना जाता है। ईरान मीडिया मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशंस के जरिए झूठी सूचनाएं फैलाने में माहिर है। ट्रंप का कहना है कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर है, लेकिन फेक न्यूज और दुष्प्रचार के जरिए अपनी ताकत का भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहा है और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी ईरान के लिए दुष्प्रचार का नया हथियार बन गया है। कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थान ईरान के साथ मिलकर AI-जनरेटेड फर्जी खबरें और वीडियो फैला रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जहाजों या विमानों को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी कई रिपोर्ट्स पूरी तरह झूठी हैं और इन्हें जानबूझकर फैलाया जा रहा है और उन्हें सच में लगता है कि यह बहुत आपराधिक है क्योंकि हमारी मीडिया कंपनियां, जिनकी कोई साख नहीं है, ऐसी जानकारी दे रही हैं जिसके बारे में उन्हें पता है कि वह झूठी हैं। ट्रंप ने कहा कि यह देश के लिए बहुत खतरनाक बात है। उन्हें लगता है कि वे गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं। ट्रंप ने यहां तक कहा कि ऐसी खबरें फैलाने वाले मीडिया संस्थानों पर देशद्रोह तक के आरोप लगने चाहिए।
जंग थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे
फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच 'ईरान और अमेरिका-इजरायल' जंग के अभी इतनी जल्दी थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे। एक तरफ जहां ईरान को झुकाने के लिए 'अमेरिका-इजरायल' की तरफ से हमले तेज हो रखे हैं तो वहीं ईरान ने भी अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाने के लिए अपने हमले तेज कर दिए हैं। ईरान इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। इसके साथ ही वह अन्य ढांचों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बना रहा है।
माना जा रहा है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी इसलिए कर रहा है ताकि दुनिया में आर्थिक दबाव बढ़े और अमेरिका-इजराइल अपने हमले रोकने के लिए मजबूर हो जाएं। बता दें कि जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। साथ ही गैस आपूर्ती भी प्रभावित हो रही है। कुलमिलाकर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट गहरा रहा है। जिससे भारत भी अछूता नहीं है। भारत में भी तेल-गैस आपूर्ती को मिडिल ईस्ट जंग ने प्रभावित किया है।
जंग में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत
28 फरवरी से जारी ईरान और 'अमेरिका-इजरायल' जंग में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों (आम लोग और सैनिक) की मौत हो चुकी है और करीब 5000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं ईरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ कई ईरानी शीर्ष कमांडर और नेता भी मारे गए हैं। साथ ही इस संघर्ष में ईरान में बड़ी संख्या में घर और बुनियादी सार्वजनिक ढांचे भी नष्ट हुए हैं।
इधर ईरान के साथ युद्ध शुरू करने पर अमेरिका जो सोच रहा था वैसा हुआ नहीं। ईरान को कमतर आंकना अमेरिका की चूक रही। अब हालत यह है कि अगर अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान में तबाही मचा रहा है तो ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका भी काफी कुछ खो रहा है। इस जंग में अमेरिका के भी 13 सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि लगभग 140-150 अमेरिकी सैनिक घायल हैं, जिनमें से कई गंभीर हैं। वहीं इरानी हमलों में इजरायल के अलावा यूएई, बहरीन, क़तर, कुवैत जैसे खाड़ी देशों का भी व्यापक नुकसान हुआ है.