Trump on Strait of Hormuz: ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच चीन से मांगी मदद; होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी नाकेबंदी हटाने में मदद को कहा

ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच चीन से मांगी मदद; होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी नाकेबंदी हटाने में मदद करने को कहा, NATO देशों को कड़ी चेतावनी

Trump Seeks China Help Amid Iran War Over Strait of Hormuz

Trump Seeks China Help Amid Iran War Over Strait of Hormuz

Trump on Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल की जंग का आज 17वां दिन है। इस बीच दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के कंट्रोल वाले होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चीन से मदद मांगी है। ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी नाकेबंदी को हटाने में चीन को भी आगे आना चाहिए और तेल-गैस के जहाजों को सुरक्षित यहां से निकालने में मदद करनी चाहिए। ताकि दुनिया में ऊर्जा आपूर्ती प्रभावित न हो। ट्रंप ने कहा है कि खुद चीन होर्मुज स्ट्रेट के जरिये 90% तेल का कारोबार करता है। वहीं ट्रंप का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के लिए दूसरे देशों से बातचीत जारी है।

दरअसल, ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करते हुए चीन से मदद को लेकर बयान दिया है। ट्रंप ने कहा, "मैं पक्के तौर पर तो नहीं कह सकता, लेकिन चीन को अपना ज़्यादातर तेल 90% होर्मुज स्ट्रेट से मिलता है तो मैंने उनसे कहा, 'क्या वह आना चाहेंगे?' हो सकता है वे आएं, हो सकता है न भी आएं क्योंकि कुछ और गहरे कारण हैं कि वे क्यों नहीं आ सकते। लेकिन मेरी राय में, उन्हें आना चाहिए। सालों तक इसका कोई मतलब नहीं निकला। अगर आप पीछे जाकर देखें कि मैंने सालों पहले क्या कहा था, तो मैंने कहा था, 'हम होर्मुज स्ट्रेट को क्यों बनाए रख रहे हैं जब यह असल में चीन और कई दूसरे देशों के लिए है?' मुझे लगता है कि दूसरे देशों को हमारी मदद करनी चाहिए।"

ज्ञात रहे कि इससे पहले हाल ही में ट्रंप ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि और दूसरे देश अपने युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट की तरफ भेजें ताकि वहां से तेल-गैस के जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके। वहीं जब हाल ही में ट्रंप से पूछा गया था कि US नेवी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकरों को सुरक्षा देना कब शुरू करेगी, तो उन्होंने कहा था, "यह जल्द ही होगा, बहुत जल्द।" इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले दिनों ऑयल टैंकर ऑपरेटरों को सलाह देते हुए कहा था कि ईरान की धमकियों की परवाह किए बिना होर्मुज स्ट्रेट पार करो। क्योंकि अमेरिका ने ईरान के नेवी और वायुसेना को लगभग खत्म कर दिया है। लेकिन ईरान ने जहाजों को निशाना बनाया।

NATO देशों को कड़ी चेतावनी

वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों को भी बहुत कड़ी चेतावनी दी है। ईरान से जंग में साथ न देने पर ट्रंप NATO पर भड़क गए हैं और कहा है कि NATO का भविष्य बहुत बुरा होगा। दरअसल जब अमेरिका ईरान के साथ जंग में कूदा पड़ा है तो ऐसे में 32 NATO देशों की अमेरिका के साथ कोई प्रमुख तौर से सैन्य एक्टिविटी नहीं देखी जा रही है। ऐसे में लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को जल्द ही NATO से अलग करने का कदम भी उठा सकते हैं।

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ईरान पहले ही दे चुका धमकी

मालूम रहे कि ईरान लगातार धमकी दे रहा है कि उसके कंट्रोल वाले होर्मुज स्ट्रेट जलमार्ग (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल के जहाजों को आग में फूंक दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि बिना उसकी अनुमति के कोई भी जहाज यहां से नहीं निकल सकता। खासकार अमेरिका, इजरायल और उसके सहयोगियों के जहाजों को बिलकुल भी नहीं निकलने दिया जाएगा। तबाह कर दिया जाएगा।

जंग थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे

फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच 'ईरान और अमेरिका-इजरायल' जंग के अभी इतनी जल्दी थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे। एक तरफ जहां ईरान को झुकाने के लिए 'अमेरिका-इजरायल' की तरफ से हमले तेज हो रखे हैं तो वहीं ईरान ने भी अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाने के लिए अपने हमले तेज कर दिए हैं। ईरान इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। इसके साथ ही वह अन्य ढांचों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बना रहा है।

माना जा रहा है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी इसलिए कर रहा है ताकि दुनिया में आर्थिक दबाव बढ़े और अमेरिका-इजराइल अपने हमले रोकने के लिए मजबूर हो जाएं। बता दें कि जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। साथ ही गैस आपूर्ती भी प्रभावित हो रही है। कुलमिलाकर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट गहरा रहा है। जिससे भारत भी अछूता नहीं है। भारत में भी तेल-गैस आपूर्ती को मिडिल ईस्ट जंग ने प्रभावित किया है।

जंग में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत

28 फरवरी से जारी ईरान और 'अमेरिका-इजरायल' जंग में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों (आम लोग और सैनिक) की मौत हो चुकी है और करीब 5000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं ईरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ कई ईरानी शीर्ष कमांडर और नेता भी मारे गए हैं। साथ ही इस संघर्ष में ईरान में बड़ी संख्या में घर और बुनियादी सार्वजनिक ढांचे भी नष्ट हुए हैं।

इधर ईरान के साथ युद्ध शुरू करने पर अमेरिका जो सोच रहा था वैसा हुआ नहीं। ईरान को कमतर आंकना अमेरिका की चूक रही। अब हालत यह है कि अगर अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान में तबाही मचा रहा है तो ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका भी काफी कुछ खो रहा है। इस जंग में अमेरिका के भी 13 सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि लगभग 140-150 अमेरिकी सैनिक घायल हैं, जिनमें से कई गंभीर हैं। वहीं इरानी हमलों में इजरायल के अलावा यूएई, बहरीन, क़तर, कुवैत जैसे खाड़ी देशों का भी व्यापक नुकसान हुआ है.