हरियाणा में बनेगा आपदा प्रतिक्रिया बल, एनडीआरएफ की तर्ज पर तैयार होगी नई रेस्क्यू बटालियन

हरियाणा में बनेगा आपदा प्रतिक्रिया बल, एनडीआरएफ की तर्ज पर तैयार होगी नई रेस्क्यू बटालियन

Disaster response force to be set up in Haryana

Disaster response force to be set up in Haryana

चंडीगढ़। Disaster response force to be set up in Haryana, ऊंची इमारतों में लगने वाली आग, औद्योगिक हादसों, बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए हरियाणा अब दूसरे राज्यों की ओर नहीं देखेगा।

तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य और हाल के वर्षों में दिल्ली तथा लखनऊ समेत विभिन्न शहरों में सामने आई भयावह आग की घटनाओं से सबक लेते हुए हरियाणा की नायब सरकार पहली बार अपना हरियाणा आपदा प्रतिक्रिया बल (एचडीआरएफ) गठित करने जा रही है।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की तर्ज पर बनने वाली यह विशेष बटालियन जींद जिले के उचाना से पूरे प्रदेश में राहत एवं बचाव अभियानों का संचालन करेगी।

हरियाणा का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह आधुनिक

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम में दैनिक जागरण के ''जागरण विमर्श'' कार्यक्रम में इसकी घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप हरियाणा का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा।

यह केवल एक नई बटालियन का गठन नहीं, बल्कि राज्य के आपदा प्रबंधन ढांचे में बड़ा बदलाव है। अब तक किसी बड़े हादसे की स्थिति में हरियाणा को एनडीआरएफ की टीमों के लिए पड़ोसी राज्यों का इंतजार करना पड़ता था।

कई बार राहत एवं बचाव अभियान शुरू होने में हुई देरी से नुकसान बढ़ जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य के पास अपनी प्रशिक्षित, सुसज्जित और हर समय तैयार रहने वाली विशेष रेस्क्यू फोर्स होगी, जिससे आपदा के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण समय यानी ''गोल्डन आवर'' में ही राहत अभियान शुरू किया जा सकेगा।

 1149 जवानों की पूरी बटालियन

हरियाणा सरकार ने एचडीआरएफ का मुख्यालय जींद के उचाना में स्थापित करने का निर्णय भी रणनीतिक आधार पर लिया है। लगभग 20 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस परिसर से 1,149 जवानों की पूरी बटालियन संचालित होगी। हरियाणा के मध्य में स्थित होने के कारण यहां से राज्य के लगभग सभी जिलों तक कम समय में पहुंचा जा सकता है। यही वजह है कि किसी भी जिले में आग, बाढ़, भवन गिरने, सड़क दुर्घटना, औद्योगिक विस्फोट, रासायनिक हादसे या अन्य आपदा की स्थिति में विशेष टीमों को तेजी से रवाना किया जा सकेगा।

एक दशक में बदला हरियाणा का जोखिम स्वरूप

हरियाणा का जोखिम स्वरूप पिछले एक दशक में तेजी से बदला है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पंचकूला जैसे शहरों में बहुमंजिला इमारतों और बड़े व्यावसायिक परिसरों की संख्या लगातार बढ़ी है। वहीं पानीपत, फरीदाबाद, बहादुरगढ़ और गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों में रसायन आधारित उद्योगों के विस्तार से औद्योगिक दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा है।

दूसरी ओर पुराने शहरों की संकरी गलियां आज भी अग्निशमन विभाग के लिए चुनौती बनी हुई हैं। गुरुग्राम की हाईराइज सोसायटियों, औद्योगिक इकाइयों और गोदामों में समय-समय पर लगी आग तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों में फैक्ट्री और बाजारों में हुए अग्निकांड इस बात का संकेत है कि पारंपरिक व्यवस्था अब भविष्य की चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी आवश्यकता को देखते हुए सरकार अग्निशमन विभाग को भी नई तकनीक से लैस करने जा रही है।

विश्व स्तरीय सुविधाओं वाली आधुनियर फायर टेंडर गाड़ियां

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार विश्वस्तरीय सुविधाओं वाली आधुनिक फायर टेंडर गाड़ियों की खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड को लगभग एक किलोमीटर लंबे पाइप उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि ऐसे इलाकों में भी प्रभावी ढंग से आग बुझाई जा सके जहां बड़े वाहन पहुंचना संभव नहीं होता।

उनके अनुसार, एचडीआरएफ बनने से हरियाणा केवल आपदा के समय तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं होगा, बल्कि आपदा प्रबंधन के मामले में आत्मनिर्भर भी बनेगा।

यह बल विशेष प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों और त्वरित तैनाती क्षमता के कारण जनहानि कम करने, संपत्ति की सुरक्षा बढ़ाने और बड़े हादसों के दौरान राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।