साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट मामले में एक और खुलासा करते 5 और शातिर आरोपियों को किया काबू

Digital Arrest Case

Digital Arrest Case

पुलिस अब तक उक्त मामले में कुल 11 शातिर आरोपियो को गिरफ्तार कर चुकी।

पकड़े गए आरोपियो ने 38 लाख रुपए की ठगी की।

रंजीत शम्मी चंडीगढ़। Digital Arrest Case: यूटी पुलिस का अहम थाना माने जाने वाले साइबर क्राइम पुलिस को फिर उस वक्त एक बड़ी कामयाबी मिली। जब पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट कर ठगी के मामले में 5 और शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब तक उक्त मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पकड़े गए आरोपियो की पहचान पंजाब से 52 वर्षीय ओंकार शर्मा,43 वर्षीय अभिनव शर्मा @ अभि,43 वर्षीय जसविंदर सिंह, एसएएस नगर पंजाब से वरिंदर कुमार @ विक्की और पंजाब के जिला मोहाली निवासी 29 वर्षीय अंकुश कुमार @ तरुण गुप्ता के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार थाना साइबर क्राइम पुलिस ने यूटी पुलिस के आला अधिकारियों के दिशा निर्देशों के चलते थाना साइबर डीएसपी ए वेंकटेश की सुपरवीजन में थाना साइबर इंचार्ज इंस्पेक्टर इरम रिजवी की टीम ने आरोपियो को मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मामले का खुलासा हुआ और मामले को सुलझा लिया।

क्या था मामला।

जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ के रहने वाले शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था कि 7 जनवरी को शाम करीब 5:50 बजे उन्हें अनजान नंबरों से धमकी भरे कॉल आए।जिसमें कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि उनका कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में शामिल है।उन्हें गिरफ्तार करने, संपत्ति जब्त करने और अगर उन्होंने घर छोड़ने की कोशिश की तो गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देकर आपराधिक रूप से डराया गया।इसके तुरंत बाद शिकायतकर्ता को एक और अनजान नंबर से व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया।जिसमें "कोलाबा मुंबई पुलिस" नाम दिख रहा था।जिसके दौरान पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने उन्हें धमकाना जारी रखा और झूठा दावा किया कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। और जाली गिरफ्तारी वारंट और मनगढ़ंत दस्तावेज़ व्हाट्सएप के ज़रिए उन्हें भेजे गए।बाद में, व्हाट्सएप पर एक और कॉल सीबीआई अधिकारी के नाम से आया। जिसके दौरान कॉल करने वाले ने झूठा दावा किया कि शिकायतकर्ता के आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में किया गया है। बहुत ज़्यादा डर और धमकी के कारण शिकायतकर्ता को आरोपी के निर्देशानुसार आरटीजीएस के ज़रिए एक बैंक खाते में 38 लाख रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।शिकायतकर्ता ने बताया कि वह और उसकी पत्नी 7 जनवरी 2026 की शाम से 08 जनवरी 2026 की शाम तक अवैध रूप से फोन पर नज़रबंद रहे। कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण करके जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके आरोपियो ने बेईमानी से शिकायतकर्ता से 38 लाख रुपए की धोखाधड़ी की।

जांच का विवरण-

पुलिस जांच में पता चला कि एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट कई मॉड्यूल और म्यूल बैंक खातों के ज़रिए काम कर रहा था। पहले, इस मामले में छह आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। शिकायत के आगे के वित्तीय विश्लेषण से पता चला कि धोखाधड़ी की गई रकम में से 8 लाख रुपए ओंकार शर्मा के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। जिसे बाद में टेक्निकल सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर गिरफ्तार किया गया।पुलिस जांच के दौरान, यह सामने आया कि जसविंदर सिंह ने म्यूल बैंक खाते की व्यवस्था करने, धोखाधड़ी वाले फंड निकालने में मदद करने और नकदी दूसरे साथियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। अभिनव शर्मा @ अभी म्यूल खाताधारकों और मुख्य आरोपियों के बीच एक मुख्य बिचौलिए के रूप में काम कर रहा था।इसके अलावा, अंकुश कुमार @ तरुण गुप्ता,को विवादित रकम निकालने के बाद म्यूल खाताधारकों से नकदी इकट्ठा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। साथ ही वरिंदर कुमार @ विक्की को अपराध की कमाई को कैश के बदले यूएसडीटी  देकर इधर-उधर करने में अहम भूमिका निभाते हुए पाया गया। उसे भी जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया। जांच एक अहम मोड़ पर है। पुलिस अतिरिक्त साथियों का पता लगाने, अपराध से मिली रकम बरामद करने और पहचान की चोरी और डिजिटल धमकी के ज़रिए मासूम नागरिकों को धोखा देने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए आरोपी की पुलिस हिरासत मांगी गई है।