सांगली में 24 जनवरी से निरंकारी संत समागम, एकत्व भाव से तैयारियाँ पूर्णता की ओर

Nirankari Sant Samagam in Sangli from January 24

Nirankari Sant Samagam in Sangli from January 24

Nirankari Sant Samagam in Sangli from January 24- चण्डीगढ़ / पंचकुला / सांगलीI प्रेम, सेवा एवं एकत्व के पावन भावों से ओतप्रोत महाराष्ट्र का 59वाँ निरंकारी संत समागम आगामी 24 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक सांगली में परम पूज्य सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के दिव्य सान्निध्य में श्रद्धा एवं भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। इस त्रिदिवसीय महा आयोजन की तैयारियाँ अब अपने अंतिम चरण में हैं, जहाँ समर्पित भक्त एवं निरंकारी सेवादार पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और निष्काम सेवा-भाव के साथ समागम स्थल को सुव्यवस्थित, सुसज्जित एवं अत्यंत आकर्षक स्वरूप प्रदान कर रहे हैं।

यह संत समागम महाराष्ट्र के सांगली जनपद स्थित सांगलवाड़ी के लगभग 400 एकड़ के विशाल एवं भव्य परिसर में आयोजित किया जाएगा। इस दिव्य आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन दोपहर 2ः30 बजे से मुख्य सत्संग कार्यक्रम का शुभारंभ होगा, जिसमें देश-विदेश से सम्मिलित संत, वक्ता, गीतकार एवं कवि परमात्मा और सतगुरु के प्रति अपने श्रद्धाभाव, विचार और रचनाओं के माध्यम से भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रस्तुत करेंगे। प्रत्येक दिवस का समापन रात्रि 9ः00 बजे सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन एवं प्रेरणादायी आशीर्वचनों से होगा, जो समस्त श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का स्रोत बनेगा।

इस वर्ष महाराष्ट्र के प्रांतीय संत समागम का विषय ‘‘आत्म-मंथन’’ निर्धारित किया गया है, जो आत्मबोध, आत्मशुद्धि और मानवीय मूल्यों के जागरण की दिशा में समस्त समागम को एक गहन और सार्थक आध्यात्मिक प्रवाह प्रदान करता है।

विगत एक माह से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु भक्तों की निष्काम और निःस्वार्थ सेवाओं से समागम स्थल एक सुव्यवस्थित, भव्य और मनोहारी शामियाना नगरी का रूप ले चुका है। सतगुरु की अमूल्य शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात कर प्रत्येक आयु वर्ग के भक्त पूर्ण श्रद्धा, अनुशासन और आत्मिक उल्लास के साथ सेवाओं में निरंतर संलग्न हैं।

इन सेवाओं का यह सुंदर और प्रेरणादायी स्वरूप आम जन के लिए उदाहरण बन गया है। भक्ति, प्रेम और समर्पण से भरे मन से की जा रही ये सेवाएँ ऐसा अनुपम दृश्य प्रस्तुत करती हैं, जिसकी अनुभूति निस्संदेह शब्दों से परे है।

मानव कल्याण के उद्देश्य से आयोजित इस दिव्य आयोजन में सहभागिता के लिए जनसामान्य को नुक्कड़ नाटकों, बैनरों तथा सांगली-मिरज महानगर के गली-मोहल्लों में आयोजित खुले सत्संग के माध्यम से आमंत्रित किया जा रहा है; प्रयास यही कि अधिक से अधिक संत एवं भक्त इस आध्यात्मिक उत्सव से जुड़कर निरंकार का आसरा लेते हुए अपने जीवन को सार्थक बनायेंगे।

समागम में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आवासीय टेंट, विशाल लंगर व्यवस्था, कैन्टीन, औषधालय, सुरक्षा व्यवस्था, सुव्यवस्थित पार्किंग तथा रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से आवागमन के लिए समुचित परिवहन प्रबंध किए गए हैं। समागम परिसर में स्वच्छता एवं सुव्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रकाशन विभाग की ओर से विभिन्न स्थलों पर आध्यात्मिक साहित्य के स्टॉल लगाए गए हैं। साथ ही संत निरंकारी मिशन के इतिहास एवं मानवीय कार्यों को दर्शाने हेतु चित्रमय निरंकारी प्रदर्शनी और बच्चों के लिए विशेष रूप से भव्य बाल प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, जिसमें रचनात्मक एवं शैक्षिक कार्यशालाएँ दर्शायी जायेंगी, जो बालमन के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होंगी।

मानवता के इस महासंगम में सभी श्रद्धालु भक्त एवं सज्जन महात्मा सादर आमंत्रित है।