शिमला: 9.90 करोड़ के लोन पर 50 करोड़ का 'चक्रव्यूह'; कारोबारी ने बैंक अधिकारियों पर लगाया रिश्वत और जालसाजी का आरोप; FIR दर्ज

शिमला: 9.90 करोड़ के लोन पर 50 करोड़ का 'चक्रव्यूह'; कारोबारी ने बैंक अधिकारियों पर लगाया रिश्वत और जालसाजी का आरोप; FIR दर्ज

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Businessman Alleges Bribery and Fraud Against Bank Officials

Shimla: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एक कारोबारी ने होटल बनाने के लिए एमएसएमई योजना के तहत 9.90 करोड़ के ऋण मामले में एक प्रतिष्ठित बैंक के अधिकारियों पर षड्यंत्र रचकर करोड़ों का आर्थिक नुकसान पहुंचाने, जाली दस्तावेज बनाने और होटल जबरन नीलाम कर हड़पने की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने कारोबारी की शिकायत पर थाना बालूगंज में बीएनएस की अलग-अलग धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।

कारोबारी सुमित सूद ने दी है ये शिकायत
कारोबारी सुमित सूद की ओर से पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक साल 2015 में उन्होंने होटल के लिए मालरोड स्थित एक प्रतिष्ठित बैंक से 9.90 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट को पहले 16.55 करोड़ से घटाकर 14.55 करोड़ करने के लिए कहा और टॉपअप का वादा किया। एनजीटी प्रतिबंध, कोविड लॉकडाउन जैसी मुसीबतों के बावजूद बैंक ने ऋण का पुनर्गठन नहीं किया और खाते को बार-बार एनपीए घोषित कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक के एक अधिकारी ने उनसे रिश्वत मांगी।

सब्सिडी पास करवाने के नाम पर 26 लाख की रिश्वत मांगी: शिकायतकर्ता
जब उन्होंने इन्कार किया तो (डेट ऑफ कमेंसमेंट ऑफ कॉमर्शियल ऑपरेशन) तिथि बदलकर यूनिट को जानबूझकर तनावग्रस्त करने का काम किया गया। इसके बाद उन्हें संपत्ति योजना में ऋण का पुनर्गठन करने के नाम पर 42 लाख रुपये जमा करवाने के लिए कहा गया। उन्होंने परिवार के गहनों पर गोल्ड लोन के आधार 42 लाख का ऋण लिया और जमा करवाए, लेकिन बैंक अधिकारियों ने षड्यंत्र के तहत होटल का मूल्यांकन कम करवाकर बाद में पुनर्गठन करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद 2.60 करोड़ की सब्सिडी पास करवाने के नाम पर 26 लाख की रिश्वत मांगी, जिसे उन्होंने देने से मना कर दिया।

बैंक अधिकारियों पर ये आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक के अधिकारियों ने 5-09-24 को फर्जी एफआरआर मीटिंग के मिनट्स बनाकर उनकी उपस्थिति दिखाई, जबकि वह बैठक में गए ही नहीं थे। नियम दरकिनार करके ऋण खाते को एनपीए घोषित कर सरफेसी एक्ट के तहत आदेश जारी करवाए, जबकि उनको सब्सिडी में मिले 2.60 करोड़ रुपये जमा करवाने के बाद बैंक खाते नियमित हो गए थे। कारोबारी का दावा है कि 9.90 करोड़ के ऋण के खिलाफ उन्होंने 14.40 करोड़ से ज्यादा चुका दिए हैं, फिर भी बैंक 13 करोड़ से अधिक के ब्याज का दावा कर रहा है, जो कुल मिलाकर 45-50 करोड़ तक पहुंच सकता है। पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 318(2), 318(3), 338, 336(3), 336(4), 340(2) और 61(2) के तहत दर्ज किया है।