अशोक गहलोत का NSA पर हमला: सोनम वांगचुक की रिहाई पर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार

अशोक गहलोत का NSA पर हमला: सोनम वांगचुक की रिहाई पर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार

Ashok Gehlot Attacks on NSA

Ashok Gehlot Attacks on NSA

जयपुर: Ashok Gehlot Attacks on NSA, राजस्थान में राजनीतिक माहौल तब गरमा गया, जब लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता और इनोवेटर सोनम वांगचुक जोधपुर जेल से रिहा हुए। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, गहलोत ने केंद्र के काम करने के तरीके को "तानाशाही प्रवृत्ति" वाला बताया और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

**'समर्थक' से 'सुरक्षा के लिए खतरा' तक का सफर**
केंद्र सरकार को आईना दिखाते हुए अशोक गहलोत ने टिप्पणी की कि यह एक गहरा विरोधाभास है कि सोनम वांगचुक—जो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के समर्थक थे—आज सलाखों के पीछे धकेल दिए गए। अपने 'X' (ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए गहलोत ने लिखा:

"जब वांगचुक ने लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण के लिए अपनी आवाज़ उठाई, तो उन्हें NSA जैसे कठोर कानूनों के तहत जकड़कर जोधपुर जेल भेज दिया गया। ऐसे में, हिरासत में बिताए गए उनके 170 दिनों के लिए कौन जवाबदेह होगा?"

**170 दिनों का हिसाब कौन देगा?**
गहलोत ने वांगचुक की हिरासत की अवधि पर सवाल उठाकर केंद्र को घेरा। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों एक ऐसे व्यक्ति को—जिसे कुछ ही महीने पहले "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा" होने के आधार पर जेल में डाला गया था—आज अचानक बिना किसी ठोस सबूत के रिहा कर दिया गया? गहलोत ने यह सवाल उठाया: "वांगचुक के जीवन के कीमती 170 दिनों का हिसाब कौन देगा? अगर वह निर्दोष थे, तो उन्हें शुरू में गिरफ्तार ही क्यों किया गया था?"

**कानून का 'सुविधाजनक इस्तेमाल' और तानाशाही**
BJP को निशाने पर लेते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूछा कि क्या अब राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा केवल सत्ताधारी दल के राजनीतिक नफे-नुकसान के आधार पर तय की जाएगी? उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनों का यह "सुविधाजनक इस्तेमाल" न केवल निंदनीय है, बल्कि यह हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी एक गहरा आघात है। गहलोत ने चेतावनी दी कि देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब ज़रूर देगी। लोकतंत्र पर हमले को लेकर चिंताएँ
गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पूरे देश में कार्यकर्ता और विपक्षी दल वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर एकजुट नज़र आ रहे हैं। गहलोत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल किसी व्यक्ति के खिलाफ NSA लगाना, सरकार की हताशा को दर्शाता है।