अलवर युवक अमन म्यांमार साइबर फ्रॉड सेंटर से सुरक्षित लौटा, खुलासा भयावह परिस्थितियों का

अलवर युवक अमन म्यांमार साइबर फ्रॉड सेंटर से सुरक्षित लौटा, खुलासा भयावह परिस्थितियों का

Alwar Youth Aman Returns Safely from Myanmar

Alwar Youth Aman Returns Safely from Myanmar

Rajasthan News: Alwar Youth Aman Returns Safely from Myanmar, अलवर जिले के दाउदपुर निवासी युवक अमन हाल ही में म्यांमार साइबर फ्रॉड सेंटर के चंगुल से बचकर भारत लौटा है. बेहतर नौकरी और अच्छी सैलरी का सपना देखकर विदेश गए अमन को वहां जबरन ऑनलाइन ठगी का काम करने के लिए मजबूर किया गया. पिछले महीने म्यांमार फोर्स की छापेमारी के बाद भारतीय दूतावास की मदद से रेस्क्यू किए गए 270 भारतीय युवाओं में अमन भी शामिल था. इनमें करीब 25 युवक राजस्थान के बताए जा रहे हैं. घर लौटकर अमन ने अपनी आपबीती सुनाते हुए वहां की भयावह स्थितियों का खुलासा किया है.

लड़कियों की फर्जी आईडी से ठगी

अमन ने बताया कि पिछले साल 5 सितंबर को वह म्यांमार पहुंचा. शाम को होटल में रुकने के बाद अगली सुबह पांच बजे उसे वहां से निकाल लिया गया और रात 11 बजे ठगी कंपनी पहुंचाया गया. वहां पहुंचते ही उससे कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया गया और पासपोर्ट जब्त कर लिया गया. शुरू में उसे डाटा एंट्री जॉब का झांसा दिया गया था, लेकिन दिल्ली के एक दलाल की मदद से उसे समुद्री रास्ते से म्यांमार की सीमा पार करवाकर साइबर फ्रॉड सेंटर में ले जाया गया. 

अमन को वहां ठगी के कॉल सेंटर में काम करना पड़ा. सुंदर मॉडल लड़कियों की फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस समेत विभिन्न देशों में रह रहे भारतीयों को फंसाया जाता था.

फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट के जरिए निवेश का लालच देकर उनके बैंक अकाउंट खाली कर दिए जाते थे. आरोपी टेलीग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शेयर मार्केट के नाम पर लुभावने ऑफर देते थे. फेक ऐप से मिलते-जुलते असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म दिखाकर लोगों का विश्वास जीता जाता था. सुंदर लड़कियां अश्लील बातें करके ग्राहकों को जाल में फंसाती थीं. अमन ने खुलासा किया कि वहां भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत कई देशों के युवा काम करते थे. नौकरी के बहाने बुलाए गए इन युवाओं को जबरन ठगी में धकेला जाता था. हर भाषा जानने वाले युवा को उसी भाषा वाले क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी.

टारगेट पूरा होने पर मिलता था इनाम

प्रतिदिन तीन लोगों को फंसाना टारगेट होता था. टारगेट पूरा होने पर पार्टी और इनाम मिलता, लेकिन नाकाम रहने पर सजा दी जाती थी. ठगी के तीन मुख्य तरीके थे- डिजिटल अरेस्ट (खुद को CBI, ED या पुलिस अधिकारी बताकर), इन्वेस्टमेंट फ्रॉड (फर्जी ट्रेडिंग ऐप से) और फेक वेबसाइट के जरिए. जिस राज्य में ठगी करनी होती, वहां की स्थानीय भाषा बोलने वाले युवा से फोन करवाए जाते थे. कंपनी की तरफ से अमन को 70 हजार रुपये मासिक सैलरी का आश्वासन दिया गया था और एग्रीमेंट लेटर भी सौंपा गया. तीन-चार युवा एक कमरे में रहते थे और खाना कंपनी की ओर से मुहैया कराया जाता था. लेकिन यह सब जाल का हिस्सा था.

एक दिन म्यांमार फोर्स ने कंपनी पर छापा मारा. चीनी संचालक भाग निकले. भारतीय युवाओं ने तुरंत भारतीय दूतावास को ईमेल भेजकर मदद मांगी. इसके बाद उन्हें रेस्क्यू कर कैंप में रखा गया और 270 भारतीयों को भारत भेज दिया गया. अमन समेत ये युवा थाईलैंड के रास्ते विशेष विमान से सुरक्षित घर पहुंचे. कोटपुतली-बहरोड़ पुलिस ने 20 जनवरी 2026 को बानसूर से एक दलाल सुभाष को गिरफ्तार किया था, जो 1500 युवाओं को कंबोडिया भेज चुका था. अमन अपने रिश्तेदार के माध्यम से म्यांमार गया था, लेकिन दलालों का नेटवर्क हर जगह फैला हुआ है.