Allahabad HC का बड़ा फैसला, कहा- परीक्षा में बैठने का अधिकार जीवन के अधिकार में शामिल

Allahabad HC का बड़ा फैसला, कहा- परीक्षा में बैठने का अधिकार जीवन के अधिकार में शामिल

Allahabad High Court Order

Allahabad High Court Order

प्रयागराज : Allahabad High Court Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि परीक्षा में बैठने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान है. कोर्ट ने कहा कि किसी छात्र का भविष्य तकनीकी खामियों या प्रशासनिक सुस्ती के कारण खतरे में नहीं डाला जा सकता. बीएससी की छात्रा श्रेया पांडे की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक सरन ने यह आदेश दिया.

कोर्ट ने प्रयागराज के रज्जू भैया विश्वविद्यालय को याची के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है. याची को एडमिट कार्ड नहीं जारी होने के कारण वह परीक्षा देने से वंचित रह गई थी. मामले के याची अनुसार, राज्जू भैया विश्वविद्यालय से जुड़े उर्मिला देवी पीजी कॉलेज, हंडिया में बीएससी (बायोलॉजी) प्रथम वर्ष की छात्रा थी. याची का कहना था कि उसने 16 जुलाई, 2025 को अपनी फीस जमा कर दी थी और शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के लिए कक्षाओं में भाग लिया.

हालांकि, जब परीक्षा कार्यक्रम प्रकाशित हुआ तो उसे एडमिट कार्ड जारी नहीं किया गया. समस्या यह थी कि उसके रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी के समर्थ पोर्टल पर तय तारीख तक अपडेट नहीं हो पाए. हालांकि उसका आवेदन पोर्टल पर ड्राफ्ट के रूप में उपलब्ध था. गलती को देखते हुए कॉलेज ने विश्वविद्यालय को प्रत्यावेदन दिया, जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता सहित लगभग 30 छात्रों के रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुए है. हालांकि बाद में 25 छात्रों के रिकॉर्ड अपडेट कर दिए गए, लेकिन याचिकाकर्ता का रिकॉर्ड फिर से अपडेट नहीं हुआ.

इसलिए केवल समर्थ पोर्टल पर रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण याचिकाकर्ता को परीक्षा में बैठने का अवसर नहीं दिया गया, क्योंकि यूनिवर्सिटी उसे एडमिट कार्ड जारी नहीं कर पाई. कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई कि अधिकारियों को रिकॉर्ड अपडेट न होने की पूरी जानकारी थी और डेटा ड्राफ्ट के रूप में मौजूद था. बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की.

कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय के वकील कोर्ट को यह बताने में विफल रहे कि जब ऐसी तकनीकी त्रुटियां उनके संज्ञान में आती हैं तो वे किस मानक प्रक्रिया का पालन करते हैं. कोर्ट ने राहुल पांडे बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2025 मामले में हाईकोर्ट के हालिया आदेश का हवाला देते हुए कहा कि परीक्षा में शामिल होना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत एक मौलिक अधिकार है.

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं थी और केवल तकनीकी कमियों के कारण उसके भविष्य को खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए. कोर्ट ने विश्वविद्यालय को दो सप्ताह के भीतर शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के लिए याचिकाकर्ता की बीएससी (बायोलॉजी) पहले सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है. साथ ही परिणाम उचित समय के भीतर प्रकाशित करने के लिए कहा है ताकि याचिकाकर्ता अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सके. कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के रिकॉर्ड को उचित समय के भीतर अपडेट करने के लिए सभी उचित कदम उठाए जाएं ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो सके.