अखिलेश यादव का जवाब: "कलम और शब्द हमेशा एक नहीं होते"
Akhilesh Yadav's reply: "Pen and words are not
लखनऊ। कांशीराम जंयती पर सपा द्वारा पीडीए दिवस मनाने की तैयारी को लेकर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती द्वारा किए गए हमले का अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए जवाब दिया।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एक्स पर लिखा,‘जरूरी नहीं कलम जिसकी हो लफ्ज भी उसी के हों। ये सदैव नहीं होता कि जो लिख रहा है, शब्द उसी के हों, न ही हमेशा ये होता है कि बात से जो अर्थ निकले, वही उसका भाव भी हो। कभी-कभी लिखने वाले और लिखवाने वाले अलग भी होते हैं।
अक्सर समाज को बांटकर, अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए नकारात्मक-विभाजनकारी सियासी ताकतें, इस तरह की साजिश करती हैं और लोगों को मजबूर भी करती हैं।’
सपा प्रमुख ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘पीडीए दिवस’ उन सभी महान व्यक्तियों को समर्पित है, जिन्होंने समाज के हर पीड़ित, दुखी, अपमानित के मान-सम्मान, उत्थान और बराबरी के लिए कभी भी, किसी भी वर्चस्ववादी का साथ नहीं दिया।
पीडीए समाज इससे हर्षित है कि कांशीराम जैसे अनेक पीडीए महापुरुषों के मिशन को सच में आगे बढ़ाने का संकल्प पुनर्जीवित किया जा रहा है।
सच तो ये है कि वो भी अंदर ही अंदर खुश हैं, जो किसी मजबूरीवश अपना पक्ष स्पष्ट रूप से नहीं रख पा रहे हैं या वो कहने पर मजबूर हैं, जो कभी भी कहना नहीं चाहते हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि कहा कि हम अपने बड़ों और मुंहबोले संबंधों को सदैव मन से निभाते हैं। ऐतिहासिक तिरस्कार के कारण पीड़ा के एक सूत्र में बंधे ‘हम सब एक ही हैं’, क्योंकि हम सदैव कहते हैं, आज फिर कह रहे हैं, जो पीड़ित, वो पीडीए।
मुख्यमंत्री की जापान यात्रा पर भी तंज
सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा पर भी तंज किया। एक्स पर लिखा, ‘माना इंडिया में बुलेट ट्रेन आने की स्पीड कछुए की चाल जैसी है, लेकिन दिल्ली-लखनऊ की आपसी खींचातानी का मतलब ये नहीं कि कोई विदेश की धरती पर जाकर, इस बात पर उंगली उठाए।
भाजपाई आपस के झगड़े को विश्व मंच पर न ले जाएं। दो अलग दिशा में गए हुए लोग वास्तव में भी अलग-अलग दिशा में ही जाते हैं।’