अखिलेश यादव का सीएम योगी के शंकराचार्य बयान पर पलटवार

अखिलेश यादव का सीएम योगी के शंकराचार्य बयान पर पलटवार

Akhilesh Yadav hits back at CM Yogi Shankaracharya statement

  1. सीएम योगी के शंकराचार्य बयान पर अखिलेश का पलटवार।

  2. अखिलेश ने योगी के बयान को अपमानजनक, अहंकारी बताया।

  3. महाकुंभ मौतों पर सवाल उठाते हुए नैतिक अधिकार पर प्रश्न।

लखनऊ। सीएम योगी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर सदन में पहली बार बयान दिया। इसके बाद से विपक्ष भी शंकराचार्य को लेकर सरकार पर हमलावर हो गया है। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सीएम योगी के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने महाकुंभ में हुई भगदड़ में मौत के आंकड़े से लेकर शंकराचार्य विवाद तक सरकार पर जमकर हमला किया।

बिना नाम लिए सपा प्रमुख ने एक्स पर लिखा, ‘पहन ले कोई जैसे भी चोले पर उसकी वाणी पोल खोले। परम पूज्य शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी।

ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा, जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं। जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी।’

धर्म-पद पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं

सपा प्रमुख ने आगे लिखा कि जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं, वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं। अपने बयान में उन्होंने कानून का शासन बोल दिया, जैसे ही इस पर ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दोबारा सदन बुलाएंगे या एक टांग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे।

उन्होंने लिखा कि जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है। अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है। वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि ’जब मुंह खोला, तब बुरा बोला!’ उन्हाेंने लिखा कि ‘हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है, यही सच्ची सच्चाई है। जिस समाज के खिलाफ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफरत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है।

'इनका बस चले तो विवादित फिल्म भी रिलीज कर दें'

अखिलेश यादव ने लिखा कि इनका बस चले तो जो विवादित फिल्म आई है उसका नाम बदले बिना ही रिलीज भी कर दें और टैक्स फ्री भी कर दें। अगले चुनाव में वो समाज एक-एक वोट उनके खिलाफ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा, उनकी सरकार हटाकर नई सरकार बनाएगा फिर इत्मीनान-आराम से मिलजुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा।

शंकराचार्य पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा। एक अन्य पोस्ट में जाम का फोटो पोस्ट कर सपा प्रमुख ने तंज किया कि यूपी वाले भाजपा सरकार से पूछ रहे हैं कि जामनगर गुजरात में है या लखनऊ में है।