बंगाल फतह के बाद अब 'यूपी' की बारी: जंबो टीम की वापसी और मई में बड़े फेरबदल की तैयारी
After the Conquest of Bengal, Now It's 'UP's' Turn
लखनऊ। After the Conquest of Bengal, Now It's 'UP's' Turn, बंगाल समेत तीन राज्यों के चुनावी कुरुक्षेत्र में भगवा पताका फहराने के बाद अब भाजपा नए उत्साह और संकल्प के साथ उत्तर प्रदेश में चुनावी रथ हांकेगी। पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव में झटका खाने के बाद यूपी के विधानसभा चुनाव को नाक का सवाल बना लिया है, ऐसे में पार्टी चुनावी प्रबंधन में कुशल चेहरों को संगठन एवं सरकार में वरीयता देते हुए आगे बढ़ेगी। पार्टी का मनोबल बढ़ा है, ऐसे में संगठन एवं सरकार में बड़ा फेरबदल करने से भाजपा नहीं हिचकेगी। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कल्याणकारी नीतियों एवं नए भारत के संकल्प को दिया है।
भाजपा सालभर चुनावी मोड में रहती है। उत्तर प्रदेश में 2017 से 2022 तक भाजपा को बड़ी सफलता दिलाने वाले सुनील बंसल ने बंगाल में भी जीत दिलाकर पार्टी में नया आत्मविश्वास भरा है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव की सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं, जहां भाजपा संगठन विस्तार, मंत्रिमंडल में फेरबदल, निगम आयोग एवं बोर्ड में समायोजन समेत कई मोर्चों पर उलझी हुई है।
इससे चुनावी जमीन बनाने एवं कील कांटों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेजी नहीं पकड़ पा रही। अब यूपी में भाजपा मई माह में सभी प्रकार के विस्तार एवं बदलाव का अध्याय पूरा करके चुनावी रनवे पर आगे बढ़ जाएगी। पार्टी बंगाल में चुनावी प्रबंधन संभालने वाले यूपी के चेहरों को इसी माह होमवर्क दे देगी।
बंगाल में जीत का पहाड़ पार करने में यूपी के भाजपाइयों की भी बड़ी भूमिका रही। बंगाल में यूपी के 54 भाजपाइयों की जंबो टीम उतारी गई थी, जिसमें से मंत्री जेपीएस राठौर और पूर्व मंत्री सुरेश राणा को छह क्षेत्रों में से दो की कमान दी गई थी, वहीं पांच चेहरों को एक-एक जिला दिया गया। पार्टी ने चुनावी दृष्टि से राज्य को छह क्षेत्रों में बांटा, जिसमें तीन का जिम्मा कमान सरकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को दिया गया था। राठौर को भाजपा ने पिछली साल अक्टूबर में ही कोलकोता दक्षिण व पूर्व मंत्री सुरेश राणा को पिछले वर्ष नौ नवंबर को बंगाल भेजकर कोलकोता नार्थ चौबीस परगना का जिम्मा दिया।
मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु के पास कोलकोता नार्थ क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें थीं। कन्नौज के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक के पास हुगली का दायित्व था। मंत्री दिनेश खटीक एवं सांसद अतुल गर्ग के पास बैरकपुर लोकसभा का जिम्मा रहा। समीकरणों के हिसाब से कड़ी सीट जगदल का चुनावी दायित्च एमएलसी धमेंद्र भारद्वाज ने संभाला। बंकिमचंद चटर्जी की धरती नईहाटी सीट पर चुनावी प्रबंधन एमएलसी अरुण पाठक ने बताया कि यहां पार्टी ने वंदेमातरम का प्रभावी नारा दिया।
पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी के पास तीन सीटें मुश्किल समीकरणों वाली बशीरहाट एवं हिंगलगंज समेत तीन सीटें थीं, जिसमें दो में पार्टी ने जीत दर्ज किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गौतमबुद्धनगर के सांसद डा. महेश शर्मा ने बंगाल में भाजपाइयों के बीच पहुंचकर जीत का जश्न मनाया।