भारत 2038 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा! अमेरिका को देगा पटकनी, EY की लेटेस्ट रिपोर्ट

Second Largest Economy
नई दिल्ली: Second Largest Economy: EY इकोनॉमी वॉच के अगस्त 2025 अंक के अनुसार भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभर रहा है, जिसके मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे में हाई सेविंग और इंवेस्टमेंट रेट अनुकूल डेमोग्राफी और एक स्थायी राजकोषीय स्थिति शामिल है. टैरिफ दबाव और व्यापार में मंदी जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत का लचीलापन घरेलू डिमांड पर उसकी निर्भरता और आधुनिक तकनीकों में उसकी बढ़ती क्षमताओं से उपजा है.
भारत की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, "भारत की तुलनात्मक मजबूती, इसका युवा, स्किल वर्कफोर्स, मजबूत सेविंग, निवेश दरें और अपेक्षाकृत टिकाऊ डेब्ट प्रोफाइल हाई ग्रोथ को बनाए रखने में मदद करेंगे. महत्वपूर्ण तकनीकों में लचीलापन और एडवांस कैपेबिलिटीज का निर्माण करके भारत 2047 तक अपनी विकसित भारत की आकांक्षाओं के और करीब पहुंचने की स्थिति में है."
विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं
सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत 2025 में 28.8 साल की औसत के साथ दूसरी सबसे ऊंची बचत दर के साथ सबसे आगे है, जबकि सरकारी कर्ज-जीडीपी अनुपात के 2024 के 81.3 प्रतिशत से घटकर 2030 तक 75.8 फीसदी होने का अनुमान है. वहीं, अन्य देशों में ऋण का स्तर बढ़ रहा है.
आईएमएफ के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 2030 तक 20.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. IMF द्वारा अनुमानित 2028-2030 की औसत विकास दर का उपयोग करते हुए, भारत 2038 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जिसकी अनुमानित जीडीपी 34.2 ट्रिलियन डॉलर होगी.
अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से तुलना
अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान की तुलना में भारत की स्थिति यूनीक है. हालांकि, चीन 2030 तक अनुमानित 42.2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ ओवरऑल साइज में सबसे आगे है, लेकिन उसकी बढ़ती जनसंख्या और बढ़ता कर्ज चुनौतियां हैं.
अमेरिका मजबूत बना हुआ है, लेकिन उसे सकल घरेलू उत्पाद के 120 प्रतिशत से अधिक ऋण स्तर और धीमी विकास दर का सामना करना पड़ रहा है. इसके विपरीत भारत में युवा डेमोग्राफी, बढ़ती घरेलू मांग और एक स्थायी राजकोषीय दृष्टिकोण का संयोजन है, जो इसे लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए सबसे अनुकूल पथ प्रदान करता है.
विकास की दृष्टि से भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे गतिशील है, जो विश्व अर्थव्यवस्था और अन्य सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से काफी आगे है. 2024 में इसकी वृद्धि दर अमेरिका की तुलना में 2.3 गुना है. हालांकि, बाद के वर्षों में भारत की वृद्धि दर अमेरिका की तुलना में 3.1 से 3.6 गुना के बीच रहने का अनुमान है.
भारत 2037 से 2038 के आसपास 2021 के पीपीपी अंतरराष्ट्रीय डॉलर में मापी गई अमेरिकी जीडीपी को पार कर सकता है. उस समय दोनों देशों का जीडीपी स्तर लगभग 32 ट्रिलियन डॉलर से 33 ट्रिलियन डॉलर के आसपास हो सकता है. इस प्रकार भारत को दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में बस एक दशक का समय लग सकता है.
स्ट्रक्चर ऑफ डिमांड
टॉप पांच अर्थव्यवस्थाएं अपनी डिमांड स्ट्रक्चर के संदर्भ में स्पेसिफिक विशेषताएं प्रदर्शित करती हैं. निजी और सरकारी दोनों प्रकार के व्ययों को मिलाकर अंतिम व्यय के संदर्भ में जर्मनी, जापान, अमेरिका और भार इन चारों देशों का जीडीपी के मुकाबले फाइनल कंजप्शन का अनुपात 70 प्रतिशत से अधिक है.
इन अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका सबसे अधिक कंजप्शन ओरिएंटेड इकोनॉमी है, जिसकी जीडीपी के मुकाबले फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर का अनुपात 80 प्रतिशत से अधिक है.भारत में वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2323 के दौरान जीडीपी के मुकाबले फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर का अनुपात भी काफी हाई (71.4 से 72.7 प्रतिशत) रहा है.
ग्रोस कैपिटल फॉर्मेंशन (GCF) के आधार पर भारत में निवेश अनुपात सबसे अधिक है, जो वित्त वर्ष 21 को छोड़कर 30 पर्सेंट से अधिक रहा है. अमेरिका की जीडीपी के मुकाबले जीसीएफ अनुपात सबसे कम है.
भारत का निर्यात-जीडीपी अनुपात हाल के वर्षों में 18.7 से 23.3 फीसदी के बीच रहा है. गुड्स एंड सर्विस निर्यात में जर्मनी का हिस्सा सबसे ज़्यादा है, जो 43.5 से 50.9 प्रतिशत के बीच है. इसी तरहा यह वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है. अमेरिका वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात पर इतना अधिक निर्भर नहीं है. इस संबंध में भारत की स्थिति संतोषजनक है, जहां जीडीपी का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात से आता है.
भारत की प्रगति की गति न केवल डेमोग्राफी, बल्कि स्ट्रक्चरल रिफॉरम और सुदृढ़ बुनियादी ढांचों से भी सुदृढ़ हो रही है. हाई सेविंग और निवेश दरें पूंजी निर्माण को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि राजकोषीय समेकन स्थिरता में सुधार ला रहा है. जीएसटी, IBC, UPI के माध्यम से वित्तीय समावेशन और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन जैसे सुधार उद्योगों में प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर रहे हैं. साथ ही बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश और AI, सेमीकंडक्टर, रेन्युएबल एनर्जी जैसी उभरती टेक्नोलॉजी को अपनाना लॉन्ग टर्म रीसाइलेंस के लिए आधार तैयार कर रहा है.
यह भी अनुमान है कि भारत 2028 तक मार्केट एक्सचेंज रेट के लिहाज से जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ भारत की जीडीपी के लगभग 0.9 फीसदी को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन एक्सपोर्ट डाइवरसिफिकेशन, मजबूत घरेलू मांग और व्यापार साझेदारी को बढ़ावा देने जैसे उचित उपायों से जीडीपी की वृद्धि पर उनके प्रभाव को केवल 0.1 प्रतिशत तक सीमित रखा जा सकता है.