अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किया हमला; अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने के जवाब में अटैक, होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा टकराव

US Attack on Iran After Apache Helicopter Down Near Hormuz Strait

US Attack on Iran After Apache Helicopter Down Near Hormuz Strait

US Attack on Iran: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जंग का दूसरा भयानक दौर शुरू होता दिख रहा है। दरअसल अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिका के अनुसार, US आर्मी के अपाचे हेलीकॉप्टर को ईरान द्वारा मार गिराने के जवाब में और सेल्फडिफेंस में हमला शुरू किया गया। अमेरिकी सेना ने सीधेतौर से ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया।

बता दें कि, ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल ने अप्रैल में युद्धविराम किया था लेकिन पिछले कुछ दिनों में युद्धविराम को किनारे कर बार-बार अमेरिका-ईरान और इजरायल-ईरान में टकराव देखने को मिला और एक-दूसरे पर हमले किए गए। पिछले महीने 8 मई को समंदर में होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के पास अमेरिका-ईरान ने एक-दूसरे पर ड्रोन्स और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए थे। यहां यह ज्ञात रहे कि अमेरिकी सेना (US Military) ने होर्मुज स्ट्रेट में पूरी तरह से नाकाबंदी की हुई है।

US Central Command ने क्या कहा?

ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए जाने को लेकर US Central Command ने आधिकारिक तौर से बयान जारी किया है। बयान में बताया गया कि ''8 जून को US आर्मी के अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में, कमांडर-इन-चीफ़ के निर्देश पर US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की फ़ोर्स ने 9 जून को ईरान के ख़िलाफ़ आत्मरक्षा में हमले शुरू किए। US एयर फ़ोर्स और नेवी के फ़ाइटर जेट्स से सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल करके होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के एयर डिफ़ेंस, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सर्विलांस रडार साइट्स पर हमले किए गए।''

यूएस सेंट्रल कमांड ने आगे कहा, ''यह ऑपरेशन अमेरिकी फ़ोर्स और इलाके के पानी से गुज़रने वाले अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाज़ों पर हाल ही में हुए हमलों का एक उचित जवाब था। अमेरिकी फ़ोर्स सतर्क है और ईरान की अनुचित आक्रामकता से बचाव के लिए तैयार है।'' इससे पहले यूएस सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी थी कि Strait of Hormuz के पास पेट्रोलिंग कर रहे US आर्मी के AH- 64 अपाचे हेलीकॉप्टर के क्रैश होने के बाद US नेवल फोर्सेस और एयर फ़ोर्स ने उसके दो क्रू सदस्यों को दो घंटे के भीतर सुरक्षित बचा लिया गया और उनकी हालत स्थिर है।

ट्रंप ने कहा था- हमले का जवाब तो देना होगा

ईरान द्वारा US आर्मी के अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी बौखलाये हुए नजर आए। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बयान जारी करते हुए कहा था, ''मुझे अभी हमारी ग्रेट मिलिट्री ने बताया है कि कल रात ईरानियों ने होर्मुज स्ट्रेट पर पेट्रोलिंग करते समय हमारे एक बहुत एडवांस्ड अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया। इसमें दो पायलट शामिल थे, दोनों सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई है। फिर भी, यूनाइटेड स्टेट्स को इस हमले का जवाब देना ही होगा।''

US Attack on Iran After Apache Helicopter Down Near Hormuz Strait
 

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान का हमला

अमेरिका के हमले से ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दूसरे देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान के हमले की खबर है। कहा जा रहा है कि ईरान ने चार बैलिस्टिक मिसाइलों से जॉर्डन में अम्मान के पास अमेरिका के सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि बिना किसी हिचकिचाहट के हमलों का करारा जवाब दिया जाएगा। बता दें कि यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी जारी है।

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मिडिल ईस्ट संघर्ष ने कैसे बिगाड़ी ऊर्जा सप्लाई?

मिडिल ईस्ट संघर्ष ने वैश्विक तौर से ऊर्जा आपूर्ती और सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। भारत समेत विभिन्न देशों में तेल-गैस को लेकर हालात टाइट हो गए हैं और बड़े स्तर पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है। ये दुनियाभर में वैश्विक ऊर्जा संकट की नई चुनौती है। दरअसल ईरान से तनातनी के बीच ईरान के कंट्रोल वाले 'होर्मुज स्ट्रेट' (Hormuz Strait) पर अमेरिका की नाकाबंदी है। दूसरी तरफ ईरान भी यहां से जहाजों के निकलने पर शर्तें तय कर रहा है। ऐसे में तेल-गैस लेकर आने वाले जहाजों के आवागमन पर बड़ा प्रभाव पड़ा है।

'होर्मुज स्ट्रेट' क्या है और ये कितना अहम?

'होर्मुज स्ट्रेट' (Hormuz Strait) ईरान में एक समुद्री जल मार्ग है, जो पूरी तरह से ईरान के कंट्रोल में आता है। यहां से ईरान और फारस की खाड़ी से तेल-गैस की सप्लाई लेकर विभिन्न देशों के जहाज गुजरते हैं। पूरी दुनिया में तेल-गैस की सप्लाई को लेकर यह रास्ता एक बड़ा और अहम माध्यम है। जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल सप्लाई होता है। ऐसे में जब 'होर्मुज स्ट्रेट' पर बंदिश लगा दी गई है तो इस बीच भारत समेत विभिन्न देशों में ऊर्जा आपूर्ती प्रभावित हुई है।

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