श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण के जयकारों से बघौला नगरी बनी वृंदावन
Shrimad Bhagavat Katha
तीसरे दिन बाल व्यास चिरंजीव गोपाल भारद्वाज ने सृष्टि कैसे रची, सुंदर वर्णन किया
पलवल। दयाराम वशिष्ठ: Shrimad Bhagavat Katha: गांव बघौला में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन बाल व्यास चिरंजीव गोपाल भारद्वाज ने सृष्टि कैसे रची, सुंदर वर्णन करते हुए श्रोताओं को ज्ञान की गंगा में डुबोए रखा। बाल व्यास की मधुर वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बाल व्यास ने कहा कि ध्रुव एक पुण्य आत्मा थे जिनकी ईश्वर में बहुत गहरी आस्था थी। ध्रुव के पिता का नाम उत्तानपाद और माता का सुनीति था। ध्रुव ने बचपन में ही राज्य प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की जिसके परिणामस्वरूप उसे पृथ्वी पर राज्य प्राप्त हुआ, वह राजा बना और फिर स्वर्ग में भी जगह मिली।

कथा का आयोजन गांव बघौला की पूर्व सरपंच मूर्ति देवी के आर्शीवाद से उनके पुत्र मदन गोपाल उर्फ मन्नी, घनश्याम, लीलंत व दिनेश की ओर से किया जा रहा है। बाल व्यास चिरंजीव गोपाल भारद्वाज की ओर से संगीतमयी भजन से श्रोतागण झूमते नजर आए।
“राधे-राधे” और “जय श्री कृष्ण” के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इससे बघौला नगरी वृंदावन बनी रही। भगवान विष्णु व ध्रुव की सुंदर झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। सभी ने उनसे आशीर्वाद लेकर अपने को धन्य किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और कथा का आनंद लिया।