नील कत्याल कौन हैं? भारतीय मूल के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी ट्रंप के टैरिफ को चुनौती, सिक्का उछालकर हुआ था फैसला

नील कत्याल कौन हैं? भारतीय मूल के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी ट्रंप के टैरिफ को चुनौती, सिक्का उछालकर हुआ था फैसला

Indian Origin Lawyer Defeated Trump

Indian Origin Lawyer Defeated Trump

वॉशिंगटन: Indian Origin Lawyer Defeated Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त व्यापारिक फैसलों को उस समय करारा झटका लगा, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा लगाए गए 'इमरजेंसी टैरिफ' को अवैध घोषित कर दिया. इस कानूनी लड़ाई के पीछे जिस शख्स का दिमाग रहा, वह हैं भारतीय मूल के प्रख्यात वकील नील कात्याल. कात्याल की दलीलों के आगे राष्ट्रपति का आदेश टिक नहीं सका और कोर्ट ने साफ किया कि व्यापार को नियंत्रित करने की असली शक्ति संसद (कांग्रेस) के पास है, न कि राष्ट्रपति की मनमानी शक्तियों में.

कौन हैं नील कात्याल?

शिकागो में जन्मे नील कात्याल भारतीय अप्रवासी माता-पिता की संतान हैं. उनके पिता एक इंजीनियर और माता डॉक्टर हैं. कात्याल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है; उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और प्रतिष्ठित येल लॉ स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी की. कानून की दुनिया में उनका कद इतना ऊंचा है कि उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज स्टीफन ब्रेयर के साथ क्लर्क के रूप में भी काम किया है.

अदालत में दी ट्रंप को मात

नील कात्याल वर्तमान में 'मिलबैंक एलएलपी' में पार्टनर और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर हैं. ट्रंप के खिलाफ पैरवी करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति 'आपातकालीन शक्तियों' का बहाना बनाकर संसद के अधिकारों को नहीं छीन सकते. कोर्ट ने कात्याल की दलील को सही माना कि व्यापार और आयात शुल्क तय करना विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है.

अनुभव का खजाना

नील कात्याल कोई साधारण नाम नहीं हैं. ओबामा प्रशासन के दौरान वे अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं. उनके नाम 50 से अधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार और नागरिक अधिकारों का पक्ष रखने का रिकॉर्ड है. इससे पहले वे ट्रंप के चर्चित 'ट्रैवल बैन' को भी अदालत में चुनौती दे चुके हैं. इतना ही नहीं, दुनिया भर में चर्चित रहे जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर केस में भी उन्होंने विशेष अभियोजक की भूमिका निभाई थी.

उपलब्धियों से भरा करियर

कात्याल की कानूनी विशेषज्ञता के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया गया है. वे 'द अमेरिकन लॉयर' द्वारा 2017 और 2023 में 'लिटिगेटर ऑफ द ईयर' चुने गए. इसके अलावा, उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'एडमंड रैंडॉल्फ अवॉर्ड' से भी नवाजा गया है. वे ट्रंप के खिलाफ 'Impeach: The Case Against Donald Trump' नामक चर्चित पुस्तक भी लिख चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद नील कात्याल एक बार फिर अमेरिकी राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गए हैं.