Ashok Gehlot और Sachin Pilot के बीच बयानबाजी से राजस्थान कांग्रेस में फिर गहराई गुटबाजी, सियासी हलचल तेज
War of words between Ashok Gehlot and Sachin Pilot deepens
War of words between Ashok Gehlot, करीब ढाई साल से राजस्थान में विपक्ष में बैठी कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाजी सामने आ गई है. सचिन पायलट पर सीधा सवाल खड़े करने वाले पूर्व सीएम अशोक गहलोत अब मामला खत्म होने का दावा कर रहे रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वाकई पूर्णविराम है, कोई अल्पविराम या इन सबसे इतर कुछ और? क्या कांग्रेस की खेमेबाजी गहलोत के इस बयान के बाद शांत हो जाएगी या करौली में हाल ही में पायलट के मंच से दिखे पलटवार आगे भी जारी रहेंगे?
पायलट बोले- मोहब्बत की दुकान खोलनी है
रविवार (7 जून) को गहलोत ने 25 सितंबर 2022 की घटना पर बात करते हुए मानेसर एपिसोड का भी जिक्र किया था. इसके बाद पायलट ने कहा, "बयान में सिर्फ इतना ही सुना है कि गहलोत मुझे भी वैभव की तरह समझते हैं और वैसा ही स्नेह देते हैं. अब दोनों को मिलकर मोहब्बत की दुकान खोलनी है." पायलट की प्रतिक्रिया के बाद पूर्व सीएम ने कहा कि अब सभी बातों पर पूर्ण विराम लगाकर कांग्रेस में एकजुट होकर सबको एक साथ चलना चाहिए. मेरे आज के बयान के बाद सब पुरानी बातें खत्म हो जानी चाहिए. आज की मेरी मीडिया से बात के बाद यह मुद्दा भी खत्म होगा और सब लोग करीब आएंगे. अपनी-अपनी गलतियां स्वीकार करेंगे. चाहे मैंने गलती की हो चाहे किसी और ने की हो.
गहलोत ने कही पुरानी बातें छोड़कर एकजुट होने की बात
गहलोत बोले कि मैं जैसलमेर में ही कह दिया था- भूलो और माफ करो (फॉरगिव एंड फॉरगेट). इसका मतलब ही यही था कि जो भी कांग्रेस के नेता हैं, ना सिर्फ जो बाहर (मानेसर) गए, केवल बाहर गए उनके लिए नहीं कह रहा था बल्कि सबके लिए कह रहा था भूलो और माफ करो. उन्होंने कहा कि पुरानी बातें छोड़कर सब मिलकर पार्टी की छत के नीचे आगे चलो. अगर सब नेता इस बात को समझ जाते तो आज स्थिति दूसरी होती. मैं बार-बार इस बात को नहीं उठाना चाहता और ना ही इस पर कमेंट करना चाहता हूं. अब मैं समझता हूं कि इसके बारे में कमेंट करना उचित नहीं लगता.

इससे पहले, गहलोत ने कहा था कि पायलट को गलती स्वीकार करनी चाहिए.
राजनीतिक गलियारों में गूंज रहे हैं ये सवाल
- क्या गहलोत के कहने से कोई भी मामला शुरू और उनके कहने से ही कोई भी मामला खत्म मान लिया जाए?
- कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के सामने जब दोनों नेताओं की दिल्ली में बातचीत हुई, उसके बाद राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा?
- फिर से दोनों खेमों से बयानबाजी क्यों शुरू हुई?
- गहलोत के बयान के बाद क्या वाकई खेमेबाजी पर विराम लगेगा?
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
वरिष्ठ पत्रकार श्यामसुंदर शर्मा कहते हैं कि अशोक गहलोत के मन में सत्ता का मोह है और वह खुद इन चीजों पर कायम नहीं रह पाते. गहलोत कभी सचिन पायलट को आगे बढ़ता देखकर खुश नहीं होंगे. उनके मुताबिक, पार्टी का नेतृत्व भी अब अशोक गहलोत के पक्ष में नहीं दिख रहा. लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के निगाहें खुद को मजबूत करने पर हैं और इसका असर कांग्रेस को कमजोर कर सकता है.
किरोड़ी लाल मीणा का बड़ा दावा
दरअसल, गहलोत के ताजा बयान के पीछे माना जा रहा था कि पायलट को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की तैयारी है, इसी वजह से पूर्व सीएम हमलावर है. लेकिन कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने इस बारे में बड़ा दावा किया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह ना तो पूर्णविराम है और ना ही अल्पविराम, बल्कि यह आलाकमान के संकेत पर कुछ समय की चुप्पी है. किरोड़ी का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से कोई मैसेज हुआ होगा या कहा गया होगा कि अभी मत लड़ो, कुछ नहीं होने वाला है. इस मैसेज के बाद गहलोत पलट गए होंगे. वरना वे तो दृढ़ संकल्पित हैं कि चाहे कुछ भी हो, उनके अलावा कोई यहां पर पावर में नहीं आना चाहिए.