देहरादून आईएमए में इतिहास रचा, पहली बार 9 महिला कैडेट बनीं अधिकारी
History made at Dehradun's IMA
देहरादून। History made at Dehradun's IMA, भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के इतिहास में शनिवार का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। पहली बार नियमित प्रशिक्षण पूरा कर नौ महिला कैडेट युवा सैन्य अधिकारियों के रूप में सेना का हिस्सा बनीं।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राष्ट्रपति एवं तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल सशस्त्र सेनाओं के इतिहास में मील का पत्थर नहीं, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का प्रेरक उदाहरण है।
युवा अधिकारियों के कंधों पर देश की जिम्मेदारी
पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नेतृत्व केवल कमान संभालने का नाम नहीं है, बल्कि चरित्र, करुणा और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा की जिम्मेदारी अब इन युवा अधिकारियों के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों का विश्वास और उम्मीदें उनसे जुड़ी हैं, इसलिए सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानकर आगे बढ़ना होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य, नई तकनीकों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के दौर में भारतीय सेना को भविष्य के लिए सदैव तैयार रहना होगा। युवा अधिकारियों को आजीवन सीखते रहने, नवाचार अपनाने और नैतिक मूल्यों पर आधारित नेतृत्व विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने सैनिकों का नेतृत्व करने के साथ उनकी देखभाल और मार्गदर्शन के लिए भी जिम्मेदार होते हैं।
उन्होंने सभी ऑफिसर कैडेटों को देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। साथ ही उनके परिवारों के त्याग और सहयोग को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया। राष्ट्रपति ने आईएमए के कमांडेंट, प्रशिक्षकों और स्टाफ की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों ने इन कैडेटों को जिम्मेदार सैन्य अधिकारी बनने के लिए तैयार किया है।
मित्र देशों से आए कैडेटों को दीं शुभकामनाएं
राष्ट्रपति ने मित्र देशों से आए कैडेटों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 29 मित्र देशों के कैडेट आईएमए में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह भारत की वैश्विक सहयोग, रक्षा साझेदारी और शांतिपूर्ण संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यहां विकसित होने वाले आपसी विश्वास और पेशेवर संबंध भविष्य में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने नव नियुक्त अधिकारियों से आईएमए के आदर्श वाक्य ‘वीरता और विवेक’ को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफलता में विनम्र और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ बने रहकर ही वे भारतीय सेना और देश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकेंगे। राष्ट्रपति ने सभी पासिंग आउट कैडेटों को कमीशन प्राप्त करने पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।