उत्तराखंड में फसलों की सुरक्षा के लिए बनेगी नई घेरबाड़ नीति, वन्यजीवों और आवारा पशुओं से मिलेगा बचाव

New fencing policy to be formulated for crop protection

New fencing policy to be formulated for crop protection

 देहरादून। New fencing policy to be formulated for crop protection, उत्तराखंड में वन्यजीवों और आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए धामी सरकार ठोस योजना पर काम कर रही है। यद्यपि, सरकार ने खेतों की घेरबाड़ योजना शुरू की है, लेकिन अब वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित घेरबाड़ को समर्पित नीति लाई जा रही है।

कृषि विभाग इसका प्रारूप तैयार कर रहा है। नियोजन और वित्त विभागों के सुझावों के बाद इसे कैबिनेट में लाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी कदम का उद्देश्य पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के किसानों की फसल को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही गांवों से पलायन को थामना है।

कृषि विभाग तैयार कर रहा प्रारूप

राज्य में खेती-किसानी अनेक चुनौतियों से जूझ रही है। पलायन के कारण गांव खाली होने से कृषि भूमि के बंजर होने का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। उस पर जो खेती हो भी रही है, उस पर मौसम की मार और वन्यजीवों व आवारा पशुओं का पहरा है। इसे देखते हुए वन्यजीवों व आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा के लिए सरकार घेरबाड़ योजना लेकर आई। इसके लिए कृषि व उद्यान विभाग के बजट में 10-10 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया।

केंद्र ने भी योजना में 90 करोड़ की राशि देने का वादा किया है, जिसमें से कृषि विभाग को 25 करोड़ रुपये मिल भी चुके हैं। घेरबाड़ योजना के लिए जिलों को धनराशि देने का क्रम शुरू कर दिया गया है। इससे चयनित गांवों में किसानों के खेतों में कांटेदार तारबाड़ और चेन लिंक बाड़ लगाई जाएगी।

अब योजना के वैज्ञानिक व सुव्यवस्थित क्रियान्वयन को समर्पित नीति बनाई जा रही है। इसके अंतर्गत तारबाड़, चेन लिंक बाड़ के साथ ही पत्थरों की दीवार, जैविक बाड़, सोलर बाड़ जैसे विकल्प रखे जाएंगे, ताकि क्षेत्र विशेष की परिस्थिति के अनुसार इसे लगाया जा सके। योजना में सब्सिडी समेत अन्य बिंदुओं पर भी विचार किया जा रहा है। कृषि निदेशक दिनेश कुमार ने कहा कि घेरबाड़ नीति का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। नियोजन एवं वित्त विभाग से सुझाव लेने के बाद इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।