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उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों को कमाई करने पर ही मिलेगी प्रोत्साहन राशि

देहरादून। रोडवेज में नियमित, संविदा व विशेष श्रेणी चालक और परिचालकों को हर माह दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के नियम सख्त कर दिए हैं। अब यह राशि तभी मिलेगी, जब चालक व परिचालक ईमानदारी से काम करेंगे व बस में कम से कम 65 फीसद यात्री होंगे। यही नहीं नए मार्ग पर यह मानक 85 फीसद कर दिए गए हैं। बसों में लोड-फैक्टर बढ़ाने के पीछे रोडवेज को घाटे से उबारना वजह है। प्रोत्साहन राशि के चक्कर में कार्मिक खाली बसों को को दौड़ाने से बाज आएंगे।

रोडवेज मुख्यालय से जारी नए आदेश में विशेष श्रेणी/संविदा चालक व परिचालकों को भी नियमित कर्मियों की तरह रात्रि भत्ता देने के आदेश दिए गए हैं। नई व्यवस्था गत एक अप्रैल से लागू मानी जाएगी। इससे रोडवेज के करीब तीन हजार विशेष श्रेणी चालक-परिचालकों को लाभ मिलेगा।

आदेश में बताया गया कि संविदा व विशेष श्रेणी के चालक-परिचालकों को 25 दिन में मैदानी मार्ग पर 5000 किमी के संचालन पर 1500 रुपये व इसी अवधि में 6000 किमी बस संचालन पर 3000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

पर्वतीय मार्ग पर 25 दिन में 3500 किमी डयूटी पर 1500 रुपये और 4000 किमी डयूटी पर 3000 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलेगी। मिश्रित मार्ग पर 25 दिन डयूटी में 2000 किमी पर्वतीय मार्ग व 3000 किमी मैदानी मार्ग होने पर चालक-परिचालक को 3000 रुपये राशि मिलेगी।

रोडवेज महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि यदि कोई चालक-परिचालक छह माह तक लगातार प्रोत्साहन राशि प्राप्त करता है तो उसे सातवें माह में पांच सौ रुपये राशि अलग से दी जाएगी। अगर एक साल तक लगातार प्रोत्साहन राशि ली गई तो तेरहवें माह में 1000 रुपये अलग से दिए जाएंगे।

सभी डिपो एजीएम को आदेश दिए हैं कि डयूटी आवंटन ऐसे किया जाए ताकि सभी चालक-परिचालक को 25 दिन की डयूटी करने का अवसर मिले। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया कि लगातार 25 दिन डयूटी न कराई जाए। साथ ही चालक-परिचालकों को साप्ताहिक अवकाश भी दिए जाएं।

इस दौरान यह भी बताया गया कि लक्ष्य से अधिक आय लाने पर चालक-परिचालक को आय का आठ-आठ प्रतिशत मुनाफा भी दिया जाएगा। सभी मंडलीय प्रबंधक व डिपो एजीएम इसकी समीक्षा करेंगे।

बस संचालन के साथ ही डीजल औसत बेहतर देने पर भी चालक को अलग इनाम मिलेगा। इसमें छह माह के अधिकतम डीजल औसत और वाहन में बड़ी मरम्मत न होना आधार माना जाएगा। मैदानी मार्ग पर तीन लाख किमी बस संचालन पर 5.20 और इससे अधिक बस संचालन पर 5.00 आधार माना जाएगा।

पर्वतीय मार्ग पर दो लाख किमी तक 4.75 जबकि इससे ऊपर किमी पर 4.55 औसत माना जाएगा। नई बसों के लिए यह औसत मैदानी मार्ग पर 5.20 और पर्वतीय मार्ग पर 4.75 फिक्स रहेगा।

300 साधारण बसों की खरीद में लगातार हो रहे विलंब को लेकर रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने परिवहन निगम निदेशक बोर्ड के अध्यक्ष रामास्वामी के समक्ष नाराजगी जताई। उन्होंने निदेशक मंडल को पूर्व में पारित प्रस्ताव की याद दिलाते हुए प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने की मांग की।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम डंगवाल व महामंत्री दिनेश पंत के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल निगम निदेशक बोर्ड के अध्यक्ष से मिलने पहुंचा। संगठन के महामंत्री पंत ने कहा कि निदेशक मंडल की 25वीं बैठक में 300 नई साधारण बसों को खरीदने व ऋण पर ब्याज का भुगतान शासन स्तर से किए जाने का प्रस्ताव पारित हुआ था।

तीन मार्च 2019 को कैबिनेट ने भी बसों की खरीद को स्वीकृति प्रदान की। कहा कि आठ मार्च के शासनादेश में 75 करोड़ वितीय संस्थानों से लोन लेने व उक्त पर लगने वाले ब्याज की धनराशि को पांच वर्ष तक शासन द्वारा वहन करने के आदेश निर्गत किए थे।

बताया कि निगम की ओर से नवंबर 2018 में यूरो-4 मानक की बसें खरीदने के लिए टेंडर भी आमंत्रित किए जा चुके हैं, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। प्रतिनिधिमंडल में दिनेश गुसाई, विपिन बिजल्वाण, मेजपाल, प्रेम सिंह रावत, अनुराग नौटियाल, नवल किशोर, वरुण सबरवाल, मनीष कुमार व अन्य शामिल रहे।

दून से संचालित डग्गामार बसों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में गुरुवार को परिवहन विभाग व रोडवेज की संयुक्त टीम ने आगरा जा रही एसी स्लीपर बस सीज कर दी। इसके साथ ही विश्वनाथ सेवा की देहरादून से हरिद्वार जा रही एक बस भी सीज की गई।

दून से दिल्ली, आगरा, फरीदाबाद समेत गुडग़ांव, जयपुर, गोरखपुर और लखीमपुर तक के लिए अवैध बसों का संचालन हो रहा है। पिछले छह दिनों में हुई कार्रवाई में साफ खुलासा हो चुका है कि आइएसबीटी से डग्गामार बसों का संचालन प्रशासन व पुलिस के खुले संरक्षण में हो रहा।

अभियान में टीम ने कल्पना ट्रेवल्स की आगरा जा रही एसी स्लीपर बस (यूपी-81 एटी-3586) को पकड़ा। बस में 14 सीटें व 30 स्लीपर थे लेकिन वैध दस्तावेज कोई नहीं था। बस में 12 यात्री सवार थे, जिनसे आगरा के लिए 1100-1100 रुपये किराया लिया हुआ था। बस वाया हरिद्वार होकर जा रही थी।

वहीं, चेकिंग में दून से हरिद्वार जा रही विश्वनाथ सेवा की साधारण बस (यूके09-पीए-0911) भी पकड़ में आई। बस की फिटनेस नहीं थी ना ही इंश्योरेंस। बस में 22 यात्री सवार थे, जिनसे हरिद्वार का 70-70 रुपये किराया वसूला गया था। सभी यात्रियों को रोडवेज की दूसरी बस से रवाना किया गया।

शहर में बदहाल परिवहन के कारक बने विक्रमों, सिटी बसों, ऑटो व ई-रिक्शा पर भी परिवहन विभाग ने शिकंजे की शुरुआत कर दी है। गुरूवार को एआरटीओ अरविंद पांडे के निर्देशन में विभाग की तीन टीमों ने अलग-अलग मार्गों पर औचक निरीक्षण के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई की।

बीच सड़क में रोककर सवारी बैठाने वाले विक्रमों के साथ ही ओवरलोड व फुटकर सवारी बैठाने वाले विक्रमों को सीज किया गया। ओवरलोड व ओवरस्पीड दौड़ रहीं सिटी बसों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। सिटी बसों में टिकट न देने की भी शिकायतें मिल रही थी।
चेकिंग में 45 विक्रमों समेत सिटी बस, ऑटो और ई-रिक्शा के चालान किए गए, जबकि 12 को सीज किया गया। इसमें 20 ऐसे विक्रम का चालान किया गया जो फुटकर सवारी ले रहे थे, जबकि 16 विक्रम ओवरलोडिंग में पकड़े गए। एआरटीओ ने बताया कि ये अभियान जारी रहेगा।

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