राम मंदिर दान प्रबंधन पर उठे सवाल, छह साल पहले मिले ऑडिट सुझावों पर नहीं हुआ अमल
Questions raised over Ram Mandir donation management
अयोध्या। Questions raised over Ram Mandir donation management, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय की होती और ट्रस्ट का ऑडिट करने वाली फर्म के सुझाव पर अमल कर लिया होता, तो शायद दानराशि में चोरी से बचा जा सकता था।
छह वर्ष पूर्व एक ऑडिट फर्म के सुझाव को ट्रस्टियों ने नहीं माना और ना ही कोई एसओपी बनाई। अगर एसओपी निर्धारित कर ली जाती तो प्रत्येक स्तर पर कर्मियों व ट्रस्टियों की जवाबदेही तय हो जाती और निगरानी तंत्र व प्रबंधन मजबूत होता। वित्तीय पारदर्शिता के लिए किसी भी स्तर पर सतर्कता नहीं बरती गई।
परिणामस्वरूप नकदी की गणना में संलग्न कर्मियों ने अवसर का लाभ उठाते हुए बड़ी रकम पार कर दी, जिस पर पूरे देश में अब सवाल उठ रहे हैं।
2020 में ट्रस्ट का हुआ था गठन
सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से मंदिर निर्माण के संबंध में निर्णय आया और पांच फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का गठन किया गया तो इसके लगभग नौ माह बाद ही नवंबर 2020 में एक पदाधिकारी के आग्रह पर एक निजी ऑडिट फर्म ने इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट पर सलाह दी।
फर्म ने मंदिर में वित्तीय प्रबंधन और डेटा प्रबंधन के सिस्टम का विश्लेषण करके कई कमियों को उजागर किया। साथ ही संभावित जोखिमों के बारे में विस्तार से बताकर सुधारात्मक उपाय सुझाए। फर्म ने कहा कि एक एसओपी सभी स्तरों पर व्यवस्थित संस्कृति और प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी, जिसका पालन सभी अधिकारियों को करना होगा।
यह भी चेतावनी दी कि गैर पेशेवर कर्मी और डेटा मैनेजमेंट न होने से गुमराह करने वाली स्थिति पैदा होगी। फर्म ने कहा था कि क्रियान्वयन के स्तर पर प्रबंधन का दायरा तय न होना बहुत ही गैर-पेशेवर तरीका है। दान से संबंधित कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।

किसी भी लेन-देन और डेटा इंट्री के समय निगरानी का कोई स्तर नहीं है। एक व्यवस्थित संरचना में जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है। डेटा की सटीकता और प्रभावी मैनेजमेंट के लिए लेन-देन से जुड़े कार्यों के प्रवाह के बीच तालमेल होना चाहिए।
ट्रस्ट से जुड़े एक जिम्मेदार व्यक्ति का कहना था कि यदि एसओपी तय कर ली गई होती और रिकॉर्ड व्यवस्थित होते तो दान के आभूषणों व नकदी का हिसाब-किताब न होने से बचा जा सकता था। ऑडिट फर्म ने तत्समय दान के कुप्रबंधन को लेकर भी चिंता जताई थी। सुझाव दिया था कि इनका समुचित रखरखाव जरूरी है।
बड़ी संख्या में कर्मी कार्यरत, पर कोई एचआर नहीं
ट्रस्ट में लगभग 1500 कर्मी कार्यरत हैं। इसके बाद कोई मानव संसाधन (एचआर) विभाग नहीं है। इस पर भी फर्म ने टिप्पणी की थी। साथ ही समय-समय पर बैंक मिलान और अकाउंटिंग डेटा एंट्री व एमआइएस (मैनेजमेंट इन्फार्मेशन सिस्टम) के लिए योग्य कर्मियों को रखने की आवश्यकता की बात कही थी। बावजूद इसके किसी सुझाव पर अमल नहीं किया गया।
ऑडिट फर्म ने दिए थे ये सुझाव
ऑडिट फर्म ने चंदे और फंड मैनेजमेंट को बेहतर करने, गहनों और कीमती सामान का स्टाक रजिस्टर बनाए रखने, बैंक रिकार्ड का नियमित मिलान करने, आइटी डेटा सुरक्षा मजबूत करने, एचआर और प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने का सुझाव दिया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट की वेबसाइट पर न तो इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध है और न ही एसओपी की जानकारी दी गई है। पांच फरवरी, 2020 को ट्रस्ट बनने के बाद नवंबर, 2025 तक 4575 करोड़ से ज्यादा नकद दान मिलने का दावा किया गया।
विहिप बैठक स्थगितअयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की 25 से 29 जून तक होने वाली पांच दिवसीय बैठक स्थगित हो चुकी है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बुधवार को दिल्ली में चढ़ावा चोरी केस पर खुलकर अपनी बात रखी।
आलोक कुमार ने कहा- रामलला मंदिर के चढ़ावे में हुई इस कथित हेराफेरी के मामले को दबाया या छिपाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए तुरंत एफआइआर दर्ज की जानी चाहिए और एक रेगुलर पुलिसिया जांच की सख्त जरूरत है। उन्होंने साफ किया कि केवल आंतरिक जांच से काम नहीं चलेगा, जब तक कानून अपना काम नहीं करेगा, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो पाएगा।