आपातकाल में संघ प्रचारक को सुरक्षित निकालने वाले डॉ. अशोक गर्ग बोले- लोकतंत्र पर छाया वह अंधेरा आज भी देता है सीख

Dr. Ashok Garg

Dr. Ashok Garg, who helped a Sangh *pracharak*

 कैथल। Dr. Ashok Garg, who helped a Sangh *pracharak*: आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की धरपकड़ तेज थी। ऐसे माहौल में रोहतक के युवा स्वयंसेवक और मेडिकल इंटर्न डा. अशोक गर्ग ने संघ के वरिष्ठ प्रचारक बाबाराव मोघे को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

बाद में इमरजेंसी विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण उन्हें भी जेल जाना पड़ा। वर्ष 1975 में 23 वर्षीय अशोक गर्ग रोहतक मेडिकल कालेज रोहतक में इंटर्नशिप कर रहे थे और संघ की रोहतक नगर इकाई में नगर कार्यवाह थे। वैश्य कालेज परिसर में संघ का उत्तर भारत स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग चल रहा था।

25-26 जून की मध्यरात्रि को आपातकाल लागू होने के बाद वर्ग समय से पहले समाप्त करना पड़ा। इसी दौरान बाबाराव मोघे की गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। उस दौर का लोकतंत्र पर छाया वो अंधेरा आज भी सच्ची राह दिखाता है।

सत्याग्रह से जेल तक आपातकाल के विरोध में कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह शुरू किया। डा. गर्ग और उनके साथियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल की रोहतक सभा में इमरजेंसी विरोधी नारे लगाए और पर्चे बांटे। 23 जनवरी 1976 को उन्हें गिरफ्तार कर रोहतक जेल भेज दिया गया।