US Army Chief resign: अमेरिका के सेना प्रमुख का इस्तीफा मांगा गया; ईरान से जंग के बीच अचानक पद से हटाया जा रहा

अमेरिका के सेना प्रमुख का इस्तीफा मांगा गया; ईरान से जंग के बीच अचानक पद से हटाया जा रहा, आखिर क्या करने जा रहे ट्रंप?

US Army Chief General Randy George resign between Iran War Update

US Army Chief General Randy George resign between Iran War

US Army Chief resign: एक महीने से ऊपर का समय हो गया है और अब भी मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका की जंग जारी है। अमेरिकी सेना ईरान में ग्राउंड आपरेशन की तैयारी भी कर रही है, लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर यह आ रही है कि अमेरिकी सेना प्रमुख जरनल रैंडी जार्ज को तुरंत पद छोड़ने के लिए कह दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री/युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने US आर्मी चीफ से इस्तीफा मांग लिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को फौरन पद छोड़ने को कहा है।

ईरान से जंग के बीच अचानक यह फैसला क्यों?

बड़ी बात ये है कि ईरान से जंग के बीच अमेरिकी नेतृत्व को अचानक यह फैसला क्यों लेना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि युद्ध के बीच अमेरिका की सेना के सबसे शीर्ष नेतृत्व को इस तरह हटाना यह संकेत देता है कि या तो युद्ध की रणनीति को लेकर पेंटागन के अंदर आपसी गंभीर मतभेद हैं, या फिर अमेरिका आने वाले समय में अपनी सैन्य रणनीति में कोई बड़ा बदलाव करने जा रहा है। फिलहाल अभी इस फैसले के बारे में बहुत ज्यादा कुछ स्पष्ट नहीं है। माना यह भी जा रहा है कि ट्रंप को जिस तरह की सैन्य रणनीति की उम्मीद सेना प्रमुख से थी वैसा प्रदर्शन वे कर नहीं पाए हैं।

कई और अफसरों पर भी गाज!

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ यही नहीं कि US आर्मी चीफ को ही हटाया जा रहा है बल्कि अमेरिकी सुरक्षा से जुसे उन कई और अफसरों पर भी गाज गिरने जा रही है। जो ईरान के साथ जंग के बीच अमेरिका की सैन्य और इंटेलिजेंस शक्ति में उम्मीद मुताबिक बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाये या फिर वे इससे अलग-थलग दिखे। इसलिए कई और लोगों (टॉप जनरलों और एडमिरलों) को भी पद छोड़ने को कहा जा सकता है। इन लोगों में FBI डायरेक्टर काश पटेल भी शामिल हैं। वहीं आर्मी सेक्रेटरी डैनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डेरेमर भी ट्रंप प्रशासन छोड़ रहे हैं। हालांकि ये लोग कब पद छोड़ेंगे, ये अभी तय नहीं है।

आखिर क्या करने जा रहे ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमकाने में लगे हुए हैं और धमकी के बल पर जंग भी रोकना चाहते हैं, जैसे कि ट्रंप के हालिया बयानों से स्पष्ट होता है। लेकिन ईरान भी ट्रंप के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं है। ऐसे में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी रक्षा विभाग को एक नया रूप देने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। प्रेसिडेंट ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे को लागू करने की कोशिश में बड़े स्तर पर बदलाव किया जा रहा है ताकि अमेरिका को दुनियाभर में सबसे ताकतवर बनाए रखा जाये।

जंग थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे

फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच 'ईरान और अमेरिका-इजरायल' जंग के अभी इतनी जल्दी थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे। एक तरफ जहां ईरान को झुकाने के लिए 'अमेरिका-इजरायल' की तरफ से हमले तेज हो रखे हैं तो वहीं ईरान ने भी अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाने के लिए अपने हमले तेज कर दिए हैं। ईरान इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। इसके साथ ही वह अन्य ढांचों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बना रहा है।

माना जा रहा है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी इसलिए कर रहा है ताकि दुनिया में आर्थिक दबाव बढ़े और अमेरिका-इजराइल अपने हमले रोकने के लिए मजबूर हो जाएं। बता दें कि जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। साथ ही गैस आपूर्ती भी प्रभावित हो रही है। कुलमिलाकर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट गहरा रहा है। जिससे भारत भी अछूता नहीं है। भारत में भी तेल-गैस आपूर्ती को मिडिल ईस्ट जंग ने प्रभावित किया है।

जंग में अब तक 2500 से ज्यादा लोगों की मौत

28 फरवरी से जारी ईरान और 'अमेरिका-इजरायल' जंग में अब तक 2500 से ज्यादा लोगों (आम लोग और सैनिक) की मौत हो चुकी है और करीब 7000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं ईरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ कई ईरानी शीर्ष कमांडर और नेता भी मारे गए हैं। साथ ही इस संघर्ष में ईरान में बड़ी संख्या में घर और बुनियादी सार्वजनिक ढांचे भी नष्ट हुए हैं।

इधर ईरान के साथ युद्ध शुरू करने पर अमेरिका जो सोच रहा था वैसा हुआ नहीं। ईरान को कमतर आंकना अमेरिका की चूक रही। अब हालत यह है कि अगर अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान में तबाही मचा रहा है तो ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका भी काफी कुछ खो रहा है। इस जंग में अमेरिका के भी 13 सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि लगभग 140-150 अमेरिकी सैनिक घायल हैं, जिनमें से कई गंभीर हैं। वहीं इरानी हमलों में इजरायल के अलावा यूएई, बहरीन, क़तर, कुवैत जैसे खाड़ी देशों का भी व्यापक नुकसान हुआ है.