डिजिटल क्रांति का नया केंद्र: यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा 'डेटा सेंटर हब'

डिजिटल क्रांति का नया केंद्र: यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा 'डेटा सेंटर हब'

UP to become the

UP to become the country's largest 'data centre hub'

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदेश की 'डेटा सेंटर पॉलिसी 2021' के तहत निर्बाध बिजली आपूर्ति और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस नीति के दूरगामी परिणामों के चलते प्रदेश में बड़े पैमाने पर तकनीकी निवेश आकर्षित हो रहा है। ग्रेटर नोएडा में हीरानंदानी समूह द्वारा विकसित प्रदेश का पहला डेटा सेंटर पार्क पहले से ही सक्रिय है, जबकि अडानी और एनटीटी जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

ड्यूल ग्रिड और 24 घंटे बिजली का सुरक्षा कवच

डेटा सेंटर उद्योग की सबसे बुनियादी जरूरत स्थिर और निरंतर बिजली आपूर्ति है। इसे सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने ऐतिहासिक 'ड्यूल ग्रिड बिजली व्यवस्था' लागू की है। इस प्रणाली के तहत डेटा सेंटर पार्कों को दो अलग-अलग बिजली स्रोतों (ग्रिड्स) से जोड़ा जाएगा, ताकि एक स्रोत में तकनीकी समस्या आने पर भी संचालन बाधित न हो। इसके अलावा, इन परियोजनाओं के लिए समर्पित बिजली फीडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति की गारंटी देते हैं। योगी सरकार का मानना है कि यह ऊर्जा सुरक्षा ही वैश्विक निवेश को उत्तर प्रदेश की ओर खींचने का सबसे बड़ा कारक है।

ओपन एक्सेस से घटेगी लागत, बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

ऊर्जा की लागत को तर्कसंगत बनाने और कंपनियों को राहत देने के लिए सरकार ने 'ओपन एक्सेस' की सुविधा प्रदान की है। इसके माध्यम से डेटा सेंटर इकाइयों को खुले बाजार से प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली खरीदने की आजादी मिली है। इससे कंपनियां न केवल सस्ती और स्थिर ऊर्जा का चयन कर सकेंगी, बल्कि उनकी संचालन लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। यह कदम उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए एक अनुकूल और प्रतिस्पर्धी बाजार के रूप में पेश कर रहा है।

30 हजार करोड़ का निवेश और भविष्य का लक्ष्य

योगी सरकार ने वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर क्लस्टर्स विकसित करने का महात्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। योजना के मुताबिक, लगभग 30,000 करोड़ रुपये के निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 900 मेगावाट के करीब होगी। सरकार अब तक 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 डेटा सेंटर इकाइयों सहित कुल 8 परियोजनाओं को 'लेटर ऑफ कम्फर्ट' जारी कर चुकी है। बिजली के साथ-साथ सड़क, पानी, सीवर और अन्य औद्योगिक बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जा रहा है ताकि टेक कंपनियों को संचालन में कोई कठिनाई न हो।