UP Bus Station Modernization: 49 बस अड्डे बनेंगे हाईटेक, बिना सरकारी खर्च PPP मॉडल पर विकास

UP Bus Station Modernization: 49 बस अड्डे बनेंगे हाईटेक, बिना सरकारी खर्च PPP मॉडल पर विकास

UP Bus Station Modernization

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लखनऊ। UP Bus Station Modernization, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) माडल के तहत प्रदेश के बस स्टेशनों का आधुनिकीकरण कर रहा है। इसके तहत 49 बस स्टेशनों को पीपीपी माडल पर बिना सरकारी खर्च के हाईटेक बनाया जाएगा। इन स्टेशनों पर शापिंग माल, सिनेमाघर और आधुनिक यात्री सुविधाएं विकसित होंगी। इसके लिए बिड डाक्यूमेंट्स पर कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, इस योजना में निजी निवेशक अपने खर्च पर बस स्टेशनों को विकसित करेंगे। वहां यात्रियों के लिए शापिंग माल, सिनेमाघर, बेहतर वेटिंग एरिया, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। इससे बस यात्रियों को शहर की ओर जाना नहीं पड़ेगा।

मंत्री ने बताया कि दूसरे चरण में पहले प्रस्तावित 54 बस स्टेशनों में से छह अनुपयुक्त स्टेशनों को हटाकर और चंदौली जिले को जोड़ते हुए कुल 49 बस स्टेशनों को शामिल किया गया है। इन सभी स्टेशनों को ‘डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण’ (डीबीएफओटी) माडल पर विकसित किया जाएगा। इस योजना में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई शर्तों को आसान किया है।

अब तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही, पात्र परियोजनाओं की गणना की समय सीमा पांच वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा, निवेशकों के लिए नेटवर्थ की अनिवार्यता परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तय की गई है। कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या तीन से बढ़ाकर चार कर दी गई है, जिससे ज्यादा कंपनियां मिलकर इस परियोजना में भाग ले सकें।

परियोजना की समय सीमा भी छह महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है। वहीं, निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रस्तावित स्थलों पर 2.5 का समान फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज की निश्शुल्क अनुमति देने का प्रस्ताव है। बस स्टेशनों के लिए लीज अवधि 35 से 90 वर्ष तक रखी गई है। यदि लीज समाप्त होने के बाद डेवलपर स्वामित्व वापस नहीं करता है, तो भूमि स्वतः ही परिवहन निगम के पास वापस आ जाएगी। बिडिंग प्रक्रिया के दौरान यदि दस्तावेजों में मुख्यमंत्री स्तर पर ही कोई संशोधन हो सकेगा।

ये बस अड्डे आगरा, अयोध्या, आजमगढ़, देवीपाटन, लखनऊ, गोरखपुर, मुरादाबाद, बरेली, गाजियाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़, इटावा, नोएडा, मेरठ, हरदोई, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, कानपुर, मीरजापुर आदि क्षेत्रों में तैयार होंगे। इसमें नेपाल के सीमावर्ती सोनौली में 33 हजार वर्गमीटर, अयोध्या क्षेत्रीय कार्यालय के पास सबसे बड़ा 35 हजार वर्गमीटर और नोएडा डिपो कार्यालय में 31 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में बस अड्डे होंगे।