This responsibility can be entrusted to Advisor Dharampal!
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Chandigarh: सलाहकार धर्मपाल को सौंपी जा सकती है ये जिम्मेदारी!

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This responsibility can be entrusted to Advisor Dharampal!

This responsibility can be entrusted to Advisor Dharampal!चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल का कद बढ़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मौजूदा चंडीगढ़ राइट टू सर्विस  कमीशन के कमिश्नर केके जिंदल के कार्यकाल समाप्ति के बाद प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल को इस पद पर तैनात कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार पता चला है कि फिलहाल केके जिंदल के बाद सलाहकार धर्म पाल को चंडीगढ़ राइट टू सर्विस कमीशन का अतिरिक्त तौर पर कार्यभार सौंपा जाएगा। केके जिंदल के सेवानिवत्ति के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय इनकी स्थाई तौर पर नियुक्ति की फाइल अप्रूव करेगा। साथ ही साथ सलाहकार अपनी वीआरएस ले लेंगे, ताकि उनकी स्थाई नियुक्ति की जा सके।

बताया जा रहा है कि अपनी कार्यशैली से उन्होंने न केवल शहर में बल्कि केंद्र में भी अपनी पहचान बनाई है। टीम भावना से काम करना उनकी रग रग में बसा है। चंडीगढ़ में रहते हुए उनके इसी गुण की परख हुई। सूत्रों के अनुसार उनकी बेहतरीन कार्यशैली व स्वच्छ छवि को देखते हुए ही उन्हें इस पद पर नवाजा जा सकता है। ज्ञात रहे कि प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल की सेवानिवृत्ति अक्टूबर 2023 में है।

वर्तमान में इस पद पर तैनात केके जिंदल का कार्यकाल मार्च 2023 तक है। धर्मपाल ने चंडीगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान कई बेहतरीन कामों को अंजाम दिया है। डड्डूमाजरा वेस्ट प्लांट जो शहर के लोगों के लिए बड़ी समस्या, वहां से वेस्ट उठाने का काम इन्हीं के समय के दौरान शुरू हुआ। शहर की ट्रैफिक समस्या से निपटने को लेकर राइट्स से दोबारा सर्वे कराया गया जिसका विस्तृत प्लान प्रशासन को सौंप दिया गया है।

सब कुछ सही रहा तो ट्राईसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकता है और ट्रैफिक समस्या से निजात मिल सकती है। ज्ञात रहे कि धर्मपाल पंजाब के बंगा जिले से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री भी पंजाब इंजीनियरिंग कालेज (पैक) से ही हासिल की है। चंडीगढ़ शहर से भी वह पूरी तरह परिचित हैं इसलिए सेवानिवृति के बाद चंडीगढ़ को ही ठिकाना बना सकते हैं। प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित से भी उनके अच्छे ताल्लुकात हैं।

188 सेवाएं रखी थी राइट टू सर्विस एक्ट के दायरे में

यहां बता दें कि यूटी ने 188 सेवाओं को राइट टू सर्विस एक्ट के दायरे में रख कर उनका नोटीफिकेशन जारी किया था। इसमें  अफसरों की जिममेदारी तय की गई है और एक निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदनकर्ता की सेवा का निपटारा करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो अफसर पर कमीशन कार्रवाई करेगा।