ट्रेन में कंबल-चादर चोरी पर लगेगी लगाम, रेलवे लाएगा नया सिस्टम; जानिए 8 बड़े सुधार

ट्रेन में कंबल-चादर चोरी पर लगेगी लगाम, रेलवे लाएगा नया सिस्टम; जानिए 8 बड़े सुधार

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Theft of blankets and bedsheets on trains to be curbed

नई दिल्ली। Theft of blankets and bedsheets on trains to be curbed, ट्रेन से सफर करने के लिए जब भी आप किसी भी एसी कोच का टिकट खरीदते हैं तो आपके दिमाग में एक चिज चलती है, कि आपकी यात्रा सुरक्षित और सहूलियत भरी होने वाली है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि साफ-सुथरा एसी कोच के साथ-साथ रेलवे की तरफ से मिलने वाले साफ-सुथरे बेडरोल की गारंटी।

हालांकि क्या आप जानते हैं कि आपकी सहूलियत के लिए दिए जाने वाले यही कंबल, चादर और तौलिए अब भारतीय रेलवे के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं?कारण है कि सफर खत्म होते ही कुछ यात्रियों द्वारा इन्हें चुपके से अपने बैग में समेट लेने की आदत से रेल मंत्रालय परेशान हो चुका है। ऐसे में अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कर दिया है कि रेलवे इस चोरी को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 

लॉन्ड्री चोरी रेलवे के लिए कितनी बड़ी चिंता?

रेलवे के लिए यह चिंता कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा आप एक आरटीआई (RTI) से मिले आंकड़ों से लगा सकते हैं। जारी आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2022 से मई 2026 तक ट्रेनों के रिजर्वेशन कोच से 1.27 करोड़ चादर, तौलिया और कंबल चोरी हो चुके हैं। माना जा रहा है कि एसी कोच में सफर करने वाले कुछ यात्री सफर खत्म होने के बाद इन कपड़ों को चुपके से अपने साथ बैग में रखकर घर ले जाते हैं।

चोरी रोकने के लिए रेलवे की योजना

बता दें कि 14 जुलाई मंगलवार को भारतीय रेलवे में हुए नए सुधारों की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि अगले दो महीने के भीतर बेडरोल चोरी रोकने के लिए एक नया और मजबूत सिस्टम लाया जाएगा। हालांकि, यह नया सिस्टम कैसे काम करेगा, इसकी पूरी जानकारी रेल मंत्री ने अभी गुप्त रखी है, लेकिन अगले दो महीने में यह जमीन पर दिखाई देने लगेगा।

रेलवे के 8 नए ऐतिहासिक सुधार

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में रेलवे में पहले ही 9 बड़े सुधार किए जा चुके हैं। अब रेलवे को ज्यादा आधुनिक, पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए 8 नए रिफॉर्म्स (10वें से लेकर 17वें सुधार तक) पेश किए गए हैं। 

राख का सुरक्षित परिवहन

इस सुधार को ऐसे समझिए कि देश में कंस्ट्रक्शन के काम के लिए हर साल करीब 96 मिलियन टन फ्लाई ऐश (कोयले की राख) का इस्तेमाल होता है। खुले में ले जाने से यह हवा में उड़ती है और प्रदूषण फैलाती है। सुधार के तहत रेलवे ने इसके लिए खास बंद कंटेनर तैयार किए हैं, जिसके बाद अब यह राख बंद डिब्बों में जाएगी, जिससे धूल नहीं उड़ेगी और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।

फर्टिलाइजर की ढुलाई हुई आसान

देश में खाद की ढुलाई में रेलवे की 85% हिस्सेदारी है, लेकिन इसका किराया तय करने के 50 अलग-अलग नियम थे, जिससे भ्रम होता था। नए सुधार के बाद अब कोई उलझन नहीं होगी। मालभाड़ा सीधे 'प्रति टन प्रति किलोमीटर' के हिसाब से तय होगा। साथ ही अब खाद को सुरक्षित रखने के लिए कंटेनरों में भी भेजा जा सकेगा।

अब कंटेनर में जाएगा अनाज, नहीं होगी बर्बादी

पारंपरिक तरीके से बोरियों में अनाज ले जाने के दौरान नमी, चूहों और गंदगी की वजह से करीब 4 से 5 प्रतिशत अनाज बर्बाद हो जाता था। नए सुधार के बाद अब अनाज और दालों को पूरी तरह से बंद और सुरक्षित कंटेनरों में भेजा जाएगा। इससे अनाज पूरी तरह फ्रेश रहेगा और इसका किराया भी 'प्रति टन प्रति किलोमीटर' के पारदर्शी नियम से तय होगा।

कंटेनर बिजनेस के लिए एक ही लाइसेंस

इस बात को ऐसे समझिए कि अबतक अलग-अलग तरह के कंटेनर चलाने के लिए कंपनियों को कई तरह के चक्कर काटने पड़ते थे। रेलवे अब 'यूनिफाइड (एकीकृत) लाइसेंस' व्यवस्था ला रहा है। यानी एक ही लाइसेंस से काम हो जाएगा। यह नीति अगले 20 सालों तक लागू रहेगी, जिससे कंपनियों को लंबे समय तक बिना नियम बदले काम करने में आसानी होगी।

रेल मजदूरों को मिलेगा 'स्किल सर्टिफिकेट'

रेलवे के प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों के काम की क्वालिटी को सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब रेलवे की परियोजनाओं में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 'रेलवे स्किल सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क' लागू होगा। इससे सिर्फ प्रशिक्षित और कुशल (ट्रेन्ड) लोगों को ही काम मिलेगा, जिससे हादसों का खतरा कम होगा और काम अच्छा होगा।

ठेकेदारों के नियमों में बदलाव

रेलवे के प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हों, इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट के नियमों को कड़ा और पारदर्शी बनाया गया है। काम शुरू होने पर ही ठेकेदारों को 10% परफॉर्मेंस सिक्योरिटी देनी होगी, इसके बाद उनके चलते काम के बिलों से कोई कटौती नहीं होगी। साथ ही ठेकेदारों के लिए इंश्योरेंस जरूरी कर दिया गया है।

प्राइवेट कंपनियों को मिली खुद का ट्रेन डिब्बा

पहले ट्रेनों के डिब्बों का डिजाइन सिर्फ रेलवे की संस्था RDSO ही तय करती थी, जिससे नई तकनीक आने में सालों लग जाते थे। अब कोई भी बड़ी कंपनी या उद्योग अपनी जरूरत के हिसाब से वैगन (मालगाड़ी के डिब्बे) का डिजाइन खुद तैयार कर सकता है। रेलवे की सुरक्षा टीम (RDSO) बस इसकी जांच कर इसे हरी झंडी दे देगी।

तेल और पेट्रोलियम की ढुलाई का आधुनिकीकरण

अभी तक तेल और गैस ले जाने वाले टैंकर सिर्फ रेलवे के ही होते थे। अब बड़ी-बड़ी तेल कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से विशेष टैंक वैगन खुद डिजाइन करवा सकती हैं और इन्हें लीज (किराए) पर भी ले सकती हैं। इससे तेल की सप्लाई देश में तेजी से होगी। 

वैष्णव बोले- हमारा लक्ष्य: पारदर्शिता, सुरक्षा और स्पीड

अंत में इन सभी सुधारों पर जोर देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन सुधारों का एकमात्र मकसद भारतीय रेलवे को दुनिया के सबसे आधुनिक रेल नेटवर्क में बदलना है। चाहे यात्रियों के बेडरोल की सुरक्षा हो या देश के व्यापारियों का माल सुरक्षित पहुंचाना, मोदी सरकार का पूरा ध्यान पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर है।