श्रीमद भागवत कथा में सुखदेव-परीक्षित प्रसंग का वर्णन, भीष्म पितामह के उपदेशों से कराया अवगत

श्रीमद भागवत कथा में सुखदेव-परीक्षित प्रसंग का वर्णन, भीष्म पितामह के उपदेशों से कराया अवगत

Srimad Bhagavata Katha

Srimad Bhagavata Katha

उज्जैन/फरीदाबाद। दयाराम वशिष्ठ: Srimad Bhagavata Katha: उज्जैन में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास श्री महेश माधव शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया। कथा के दौरान उन्होंने सुखदेव जी के आगमन और राजा परीक्षित के प्रसंग का सुंदर वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

कथा व्यास ने बताया कि जब भीष्म पितामह शरशैया पर मरणासन्न अवस्था में थे, तब उन्होंने अपने वंशज धर्मराज युधिष्ठिर को धर्म, नीति और राजधर्म का उपदेश दिया। उन्होंने समझाया कि दान का सही अर्थ क्या है, दान किसे देना चाहिए और किस समय देना चाहिए। साथ ही यह भी बताया कि एक राजा को किस प्रकार धर्म और न्याय के मार्ग पर चलकर प्रजा का कल्याण करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुशासन से समाज में सुख, शांति और समृद्धि का जन्म होता है, जबकि कुशासन से समाज में अव्यवस्था और कष्ट बढ़ते हैं। विद्वानों और संतों ने सदैव शासकों को धर्म और नीति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है, जिससे समाज में न्याय और संतुलन बना रहता है।

कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया