उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग को मिलेगा नया विस्तार
The silk industry in Uttar Pradesh
लखनऊ। प्रदेश में रेशम उद्योग को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत वर्ष 2034-35 तक 360 टन रेशम धागे का अतिरिक्त उत्पादन कराया जाएगा। इसके लिए रेशम विभाग ने कार्ययोजना तैयार कर काम शुरू कर दिया है। योजना के तहत तराई और पूर्वांचल के 11 जिलों में बड़े स्तर पर शहतूत (मल्बरी) आधारित रेशम उत्पादन को विस्तार देने के प्रयास चल रहे हैं।
प्रदेश में पिछले कुछ सालों में रेशम उत्पादन के बढ़ोतरी हुई है। पूर्व में कुछ साल पहले 27 टन रेशम का ही उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर 450-500 टन तक पहुंच चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 480 टन रेशम का उत्पादन हुआ है। वहीं वर्ष 2026-27 के लिए 515 टन रेशम के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, इसके बाद भी प्रदेश में रेशम की मांग का बड़ा हिस्सा कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों से आता है। उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष से मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना शुरू की है।
इसके तहत बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर, सीतापुर, गोंडा, बलरामपुर, कुशीनगर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बिजनौर और सहारनपुर में 13,500 किसानों की 9000 एकड़ भूमि पर शहतूत पौधारोपण कराया जाएगा। शहतूत की पत्तियां ही रेशम के कीटों का मुख्य आहार होती हैं।
विभाग किसानों को शहतूत रोपण, कीटपालन गृह (रीयरिंग हाउस) निर्माण और उपकरणों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दे रहा है, जिससे अधिक किसान इस क्षेत्र में आएं। किसानों को आधुनिक तकनीक, रोग नियंत्रण और बेहतर उत्पादन के तरीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रेशम उत्पादकों को बाजार से जोड़ने और बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में भी काम कर रहा है। विभाग के अनुसार सरकार का जोर ‘फार्म टू फैब्रिक’ माडल पर है, जिसमें किसानों से लेकर बुनकरों तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है।
योजना के नोडल अधिकारी नीरेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक 1500 किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और अन्य किसानों को जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
रेशम उत्पादन के आंकड़े
| रेशम | उत्पादन (वर्ष 2025-26) | लक्ष्य (वर्ष 2026-27) |
| शहतूत रेशम | 383 टन | 414 टन |
| टसर रेशम | 31 टन | 31 टन |
| ऐरी रेशम | 66 टन | 70 टन |
| कुल उत्पादन | 480 टन | 515 टन |