महिला आरक्षण विवाद के बीच दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र कल
Special Session of Delhi Assembly
Special Session of Delhi Assembly: दिल्ली विधानसभा का एक दिन का स्पेशल सत्र बुलाया गया है. इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव आएगा. दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे शुरू होगी. सबसे पहले विधानसभा सदस्य ( MLA ) विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति से नियम-280 के अंतर्गत अपने इलाके के मामले उठाएंगे.
इसके बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जोकि दिल्ली की वित्त मंत्री भी हैं, वर्ष 2024-25 हेतु राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली सरकार के वित्त लेखे एवं विनियोग लेखे की प्रतियां सदन पटल पर पेश करेंगी. अंत में सरकारी संकल्प (नियम-90 के अंतर्गत) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन ना होने पर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश करेंगी.
सुरक्षा के रहेंगे सख्त इंतजाम
दिल्ली असेंबली सेक्रेटेरिएट के एक बयान में कहा गया है कि आठवीं विधानसभा का पांचवां सेशन मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू होगा. अधिकारियों ने कहा कि सेशन एक दिन तक चलने की संभावना है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे और बढ़ाया जा सकता है.
अधिकारियों ने कहा कि सेक्रेटेरिएट ने कार्यवाही को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए जरूरी इंतजामों को आखिरी रूप दे दिया है, खासकर हाल ही में बम की धमकियों को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम सख्त कर दिए गये हैं.
कुछ दिन पहले, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कई बीजेपी नेताओं के साथ मिलकर संसद में महिला शक्ति संशोधन बिल पास न होने का विरोध करते हुए काली पट्टी बांधी थी. इसे एक दर्दनाक घटना बताते हुए, उन्होंने लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन बिल को पास होने से रोकने के लिए विपक्ष की आलोचना की थी.
महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी संग्राम
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला सशक्तिकरण में रुकावट डाली है और कहा कि उनके तरीके से उनका असली इरादा सामने आ गया है.
बता दें कि 2029 में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 परसेंट रिजर्वेशन लागू करने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने वाला संविधान संशोधन बिल इस महीने की शुरुआत में लोकसभा में गिर गया था. बिल के खिलाफ वोट करने वाली कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि सरकार का असली एजेंडा जाति जनगणना से पहले डिलिमिटेशन करना था.
बिल के सपोर्ट में 298 सदस्यों ने वोट किया, जबकि 230 सांंसदों ने इसके खिलाफ वोट किया. वोट करने वाले 528 सदस्यों में से, बिल को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की जरूरत थी.