राम मंदिर दान मामले में SIT ने सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद
- By Gaurav --
- Tuesday, 23 Jun, 2026
SIT Submits Preliminary Report
अयोध्या स्थित Ram Mandir में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को प्रस्तुत की गई है, हालांकि इसकी सामग्री और निष्कर्षों को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है।
एसआईटी सदस्य Vijay Vishwas Pant ने बताया कि जांच से संबंधित तथ्य सरकार को सौंप दिए गए हैं, लेकिन रिपोर्ट गोपनीय है। इसलिए इस चरण में किसी भी निष्कर्ष या सिफारिश की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
आरोपों के बाद गठित हुई थी SIT
यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक Pawan Pandey ने राम मंदिर में प्राप्त दान राशि में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। आरोपों के बाद Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका
इस बीच मामले को लेकर Supreme Court of India में भी एक नई याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, दान राशि के उपयोग और प्रशासनिक कार्यों में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की निगरानी में विशेष जांच दल गठित कर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही अदालत से दान रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के निर्देश जारी करने का अनुरोध भी किया गया है।
सबूत सुरक्षित रखने की मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जांच के शुरुआती चरण में दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है। उनका तर्क है कि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो अहम साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान एसआईटी जांच का दायरा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है ताकि सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।
फिलहाल एसआईटी की रिपोर्ट राज्य सरकार के पास है और उसके अध्ययन के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई या आधिकारिक जानकारी सामने आने की संभावना है।