सरानाहुली मेले को कमरूघाटी में उमड़ा आस्था का सैलाब
सरानाहुली मेले को कमरूघाटी में उमड़ा आस्था का सैलाब

सरानाहुली मेले को कमरूघाटी में उमड़ा आस्था का सैलाब

सरानाहुली मेले को कमरूघाटी में उमड़ा आस्था का सैलाब

गोहर 15 जून (सुभाग सचदेवा)-:-
 मंडी जनपद के बड़ा देव कमरूनाग का ऐतिहासिक सरानाहुली मेला बुधवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ शांतिपूर्वक मनाया गया। देव कमरूनाग के दरबार में काफी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने अपना शीश नवाया। मौसम सुहावना होने से मेले की रौनक खूब बढ़ी। धार्मिक श्रद्धा और पर्यटन की दृष्टि से सरानाहुली मेले को लेकर कमुराह धार में आस्था का सैलाब उमड़ गया। कमरूनाग मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के जयकारों से भक्तिमय हो गया। देवता के लाठी कारदारों ने देव पूजा के लिए सुबह से ही तैयारियां कर ली थी। जैसे देव पूजा के समय आया कमरुनाग देवता के गुर, कटवाल सहित अन्य कारदारों ने धुपबती कर काहूलियों की ध्वनि के साथ मूर्ति पूजन के बाद देव झील (सर) का विधिवत पूजन किया। जिसके उपरान्त देव कमेटी की ओर से सदियों से चली आ रही रीति के आधार पर झील में सोना चांदी के जेवरों को अर्पित किया। उसके बाद मेले में आए श्रद्धालुओं ने देवता की पवित्र झील में सोना, चांदी, सिक्के और नकदी भी अर्पण की। कमरुनाग सरानाहुली मेले में मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, शिमला, कांगड़ा, हमीरपुर और पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों ने देवता के दरबार पहुंचकर शीश नवाया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर कमेटी को देवता के दर्शन करवाने के लिए पुलिस की मदद का सहारा लेना पड़ा। मेले का नजारा देखने के लिए अनेक पर्यटक भी बड़ा देव कमरूनाग पहुंचे। मंगलवार से शुरू हुए देव कमरूनाग मेले में सरोआ, रोहांडा, जाच्छ, धंग्यारा, मंडोगलू, शाला और करसोग घाटी के रास्ते देवता के भक्तों के जयकारों से गूंजायमान रहे। लेकिन इस बार देवता के दरबार में पहुंची अधिक भीड़ खुंडा तक बने सड़क मार्ग की बदौलत का कारण माना जा रहा है। ज्यादातर श्रद्धालु मंडोगलू या चैलचौक शाला के रास्ते से होते बड़ी आसानी से पहुंचे हैं। बड़ा देव की झील में सोना, चांदी, आभूषण और नोट अर्पण होने के कारण बाहरी राज्यों से आए पर्यटक देखते ही अचंभित रह गए। श्रद्धालुओं की आस्था से झील ने दुल्हन का रूप ले लिया था। लोग यहां दूर-दूर से मन्नतें मांगने आते हैं, मन्नतें पूर्ण होने के उपरांत श्रद्धालु दरबार में पहुंचकर सोने-चांदी का चढ़ावा भी चढ़ाकर जाते हैं। कुछ बुजुर्गों का कहना है कि कमरूनाग झील में सोना-चांदी और रुपए-पैसे चढ़ाने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। बता दें कि समुद्रतल से 9,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित इस झील में अरबों का खजाना होने की बात कही जाती है। जो कि पानी के बीचो-बीच बिल्‍कुल प्रत्यक्ष नज़र आता है।

एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे कमरुनाग के दर : कटवाल

देव कमरुनाग के कटवाल काहन सिंह ठाकुर ने बताया कि इस बार देव कमरूनाग के सरानाहुली मेेले में करीब 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के भाग लेने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि देवता मेला शांतिपूर्वक श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ है। तहसीलदार कृष्ण कुमार ठाकुर ने मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आभार जताया तथा मंदिर कमेटी को बधाई दी है। थाना प्रभारी गोहर देश राज ने कहा है कि मेले में किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है।