मथुरा में साइबर ठगी का बड़ा मामला: CBI अधिकारी बनकर रिटायर्ड कर्मचारी से 44 लाख रुपये ठगे
Major cyber fraud case in Mathura
मथुरा। Major cyber fraud case in Mathura, ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और पुलिस इंस्पेक्टर बताकर रिफाइनरी के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को ऐसा जाल बिछाकर फंसाया कि उनकी जीवनभर की करीब 44 लाख रुपये की जमा-पूंजी ठग ली।
फर्जी एफआइआर, मनी लांड्रिंग और गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए ठगों ने कई दिनों तक वीडियो कॉल और वाट्सएप के जरिए मानसिक दबाव बनाया। पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत देकर ठगों के खिलाफ कार्रवाई और रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
रिफाइनरी से सेवानिवृत्त कर्मचारी गोपाल प्रसाद ने बताया कि उनसे करीब 44 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई है। यह पूरी रकम उनकी जीवनभर की मेहनत की कमाई और सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य की सुरक्षा के लिए जमा की गई पूंजी थी। सात मार्च को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई।
कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली स्थित सीबीआई का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से बेंगलुरु में एक मुकदमा दर्ज है। साथ ही दावा किया कि मुंबई के एक बैंक खाते में तीन करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन उनके नाम से जुड़े हैं। इसके बाद एक महिला ने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए लगातार वॉट्सएप कॉल और वीडियो कॉल करना शुरू कर दिया।
आरोप है कि महिला ने उन्हें गिरफ्तारी, घर पर पुलिस भेजने और समाज में बदनाम करने की धमकी दी। इतना ही नहीं, यह भी कहा गया कि यदि उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो उनके परिवार के सदस्यों को भी सीबीआई जांच में फंसा दिया जाएगा।
लगातार तीन-चार दिनों तक मानसिक दबाव और डर का माहौल बनाकर उनसे कहा गया कि उनकी जमा पूंजी की आरबीआइ से जांच होगी और जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। पीड़ित ने बताया कि उस समय वह पहले से ही मानसिक तनाव में थे।
करीब एक वर्ष पहले उनके बेटे का निधन हो चुका था, जबकि बेटी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थी। इसी मानसिक स्थिति का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने उन्हें अपने झांसे में ले लिया और अलग-अलग खातों में रुपये ट्रांसफर करा लिए।
साइबर थाना प्रभारी रफत मजीत ने बताया कि प्रार्थना-पत्र मिलने पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच भी शुरू कर दी गई है। जल्द ही ठगों का पता लगाकर उनको गिरफ्तार किया जाएगा।