झारखंड कांग्रेस में बगावत: वित्त मंत्री का 'लेटर वॉर' और सामूहिक इस्तीफे की सुगबुगाहट
Rebellion in Jharkhand Congress
रांची। Rebellion in Jharkhand Congress, झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के विरुद्ध वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का आक्रमण लगातार जारी है। मंगलवार को जहां उन्होंने पलामू में अपनी बातों को दोहराया, वहीं एक बार फिर उन्होंने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी को पत्र लिखकर इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया।
पत्र में प्रदेश अध्यक्ष के प्रति उनका आक्रोश साफ प्रकट हो रहा है। दूसरी ओर, पार्टी के अंदरखाने बड़ी सुगबुगाहट है कि कभी भी बड़े पैमाने पर इस्तीफा हो सकता है। खासकर कई आदिवासी विधायक और नेता प्रदेश नेतृत्व से नाराज है।
उनका मानना है कि पार्टी में अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के नेताओं की अधिक चल रही है। इस्तीफा देने की तैयारी में शामिल कई लोग नवगठित कमेटी के सदस्य भी हैं। पार्टी का एक खेमा इन इस्तीफों को रोकने के प्रयास में जुटा हुआ है।
झारखंड कांग्रेस में हालात सामान्य नहीं दिख रहे हैं। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन वित्त मंत्री ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू को पत्र लिखा है।
उन्होंने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि यदि पार्टी हित की बात सार्वजनिक की जाए तो इसे कदापि पार्टी विरोधी नहीं माना जा सकता। हां, यदि कोई पार्टी की नीतियों, उसके सिद्धांतों का सार्वजनिक तौर पर विरोध करता हो, तो निश्चित रूप से उसे पार्टी में बने रहने का कोई अधिकार नहीं हो सकता है।
किशोर ने नई प्रदेश कमेटी में 314 लोगों को शामिल किए जाने पर प्रदेश नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि अगर 628 लोगों की कमेटी भी बना दी जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता। कमेटी में संख्या बल कितना भी बढ़ा दिया जाए, लेकिन पार्टी स्थानीय मुद्दों के प्रति मौन रहे तो संख्या बल बढ़ाने का कोई असर नहीं पड़नेवाला।
उन्होंने संकेतों में लिख दिया है कि एक को साधिए, सभी सध जाएंगे। यहां उनका संकेत प्रदेश अध्यक्ष की ओर है।
राधा कृष्ण किशोर ने इन मुद्दों को उठाते हुए प्रदेश नेतृत्व पर साधा निशाना
- प्रदेश नेतृत्व महिला आरक्षण को मुद्दा नहीं बना सका। सिर्फ कांग्रेस भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से राज्य की महिलाओं के बीच महिला विरोधी भाजपा के बारे में संदेश नहीं दिया जा सकता है।
- पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा, धनबाद, बोकारो आदि जिलों में मगही और भोजपुरी भाषा बोली जाती है, जबकि जेटेट में राज्य सरकार के द्वारा दोनों भाषाओं को हटा दिया गया। इस महत्वपूर्ण विषय पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने चुप्पी साध रखी।
- झारखंड में अनुसूचित जाति की आबादी 50 लाख है। मैंने विधानसभा के 2025-26 के बजट सत्र में अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद और अनुसूचित जाति आयोग को पुनर्जीवित करने की मांग रखी थी। इन दोनों मांगों पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व मौन रहा।
- हजारीबाग के विष्णुगढ़ में एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार होता है। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस नेता अवश्य गए थे, परंतु प्रदेश कांग्रेस कमेटी साेई रही।
- हजारीबाग में तीन अल्पसंख्यकों की निर्मम हत्या कर दी गई। प्रदेश नेतृत्व कहां सोया हुआ था?
- झारखंड सामाजिक न्याय का प्रदेश है। प्रदेश पार्टी नेतृत्व ये सार्वजनिक करे कि पार्टी संगठन के लिए कांग्रेसी नेताओं के परिवार को संगठन में कितना स्थान दिया गया है?
- केशव महतो कमलेश को सार्वजनिक तौर पर यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 314 सदस्यों की कमेटी में दलित, पिछड़ों, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य जाति के लोगों को कितनी संख्या में स्थान दिया गया है?