उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ‘रीडिंग क्रांति’ की शुरुआत, योगी सरकार का पठन संस्कृति पर बड़ा फोकस

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ‘रीडिंग क्रांति’ की शुरुआत, योगी सरकार का पठन संस्कृति पर बड़ा फोकस

Reading Revolution Launched in Uttar Pradesh

'Reading Revolution' Launched in Uttar Pradesh

लखनऊ। 'Reading Revolution' Launched in Uttar Pradesh, उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए योगी सरकार अब किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर उनके भीतर 'पठन संस्कृति' को मजबूत करने में जुट गई है। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही शासन ने परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में 'समाचार-पत्र पठन' और व्यवस्थित रूप से पढ़ने की आदतों को विकसित करने के लिए कड़े और नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर उनके भीतर भाषा दक्षता, तार्किक सोच, बेहतर संवाद क्षमता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को निखारना है। अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) ने इस योजना को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए सभी शिक्षा अधिकारियों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंप दी है।

स्क्रीन टाइम होगा कम, स्कूलों में अनिवार्य होगा 'रीडिंग ऑवर'

योगी सरकार का यह नया कदम बच्चों के बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' (मोबाइल-टीवी की लत) को कम करने और उन्हें प्रिंट मीडिया व किताबों की दुनिया से वापस जोड़ने की एक बड़ी कवायद है। नए निर्देशों के तहत अब प्रदेश के सभी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई को केवल तय पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विद्यालयों में एक समर्पित पढ़ने का घंटा निर्धारित किया जाएगा। स्कूल परिसर में नियमित रूप से ज्ञानवर्धक समाचार-पत्र और पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सुबह की प्रार्थना सभा में बच्चों द्वारा न्यूज रीडिंग को अनिवार्य किया जाएगा, जिससे बच्चों की झिझक दूर हो और उनका सामान्य ज्ञान बढ़े।

डीईएआर कैंपेन और 'सुपर रीडिंग चैलेंज' से मिलेगी गति

स्कूलो में पढ़ने के माहौल को मनोरंजक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कई अनूठे कार्यक्रम तैयार किए हैं। 

  • 'DEAR' कैंपेन: इस अभियान के तहत सप्ताह में एक निश्चित दिन और समय तय होगा, जब घंटी बजते ही छात्र, शिक्षक और स्वयं प्रधानाध्यापक अपने सारे काम छोड़कर अपनी पसंद की कोई भी साहित्यिक, वैज्ञानिक या ज्ञानवर्धक पुस्तक पढ़ेंगे।

  • रीडिंग चैलेंज: प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज जैसी गतिविधियां चलाई जाएंगी। इसके तहत तय समय सीमा में सबसे ज्यादा पुस्तकें पढ़ने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को विद्यालय स्तर पर 'चैंपियन रीडर ऑफ द इयर' के खिताब और पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

सिर्फ पढ़ना नहीं, 'स्वतंत्र लेखन' और रचनात्मकता पर भी जोर

शासन की मंशा यह है कि विद्यार्थी केवल मूक पाठक न बने रहें, बल्कि उनके भीतर मौलिक विचारों का भी जन्म हो। इसके लिए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों ने जो पुस्तकें, कहानियां या समाचार पढ़े हैं, उन्हीं के आधार पर उनसे स्वतंत्र लेखन कराया जाए। स्कूल स्तर पर निबंध, कहानी लेखन और समीक्षा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे बच्चों की रचनात्मक सोच और लेखन क्षमता को सीधे तौर पर परखा और सुधारा जा सके।

अधिकारियों को सीधे निर्देश: लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी

इस महत्वपूर्ण अभियान की गंभीरता को देखते हुए अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से सभी जिलों के प्राचार्य डायट, एडी बेसिक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को विशेष रूप से अलर्ट किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि वे स्वयं विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर इन पठन गतिविधियों की समीक्षा करें। इस पहल को उत्तर प्रदेश के सरकारी शिक्षा तंत्र को आधुनिक, जागरूक और परिणाम-उन्मुख बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।