राजस्थान में अपराध पर सख्त हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, अब जिले में वारदात पर आईजी और एसपी की तय होगी जवाबदेही
Rajasthan Chief Minister Bhajanlal Sharma takes a tough
राजस्थान में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक्शन मोड में नजर आए. सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने पुलिस अधिकारियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अब किसी भी जिले में अपराध होने पर संबंधित रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) की जवाबदेही तय होगी. उन्होंने कहा कि अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अपराधियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो कि बदमाशों की रूह कांप उठे.
कानून व्यवस्था पर समीक्षा की
बैठक में मुख्यमंत्री ने गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, सभी रेंज आईजी और जिलों के एसपी के साथ कानून-व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की. मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे. सभी जिला पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े.
तीन जिलों के अधिकारियों से जवाब-तलब
मुख्यमंत्री ने हाल ही में अलवर, श्रीगंगानगर और भरतपुर में हुई आपराधिक घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर घटना के बाद केवल कार्रवाई का दावा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी रणनीति भी जरूरी है.

सीएम भजनलाल शर्मा पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की.
गोगुंदा अतिक्रमण मामले में बड़ा कदम
उदयपुर जिले के गोगुंदा में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त नाराजगी जताई. उनके निर्देश पर इस मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी को नोटिस जारी किया गया. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी.
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि संगठित अपराध, नशा तस्करी और साइबर अपराध के मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा. अपराध के पूरे नेटवर्क, उसके सरगना, फंडिंग और सप्लाई चेन को खत्म करना होगा. उन्होंने कहा कि कार्रवाई ऐसी हो कि अपराधी और उनके संरक्षक भविष्य में अपराध करने से पहले सौ बार सोचें.
अवैध हथियारों पर विशेष अभियान
मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध हथियार संगठित अपराध की सबसे बड़ी ताकत है. जिन जिलों में आर्म्स एक्ट के मामले बढ़े हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर हथियारों की सप्लाई चेन तोड़ी जाए. हथियार बरामद होने पर केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि हथियार उपलब्ध कराने वाले पूरे गिरोह तक पहुंचकर उसे खत्म किया जाए.
ड्रग माफिया पर आर्थिक चोट
मुख्यमंत्री ने नशा तस्करों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई पर विशेष जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिए कि ड्रग तस्करों की अवैध संपत्तियां चिन्हित कर जब्त, कुर्क और ध्वस्त करने की कार्रवाई तेज की जाए. साथ ही हवाला कारोबार और भू-माफिया पर भी प्रभावी कार्रवाई कर अपराधियों के आर्थिक स्रोत बंद किए जाएं.
अपराधियों के सोशल मीडिया नेटवर्क पर नजर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों का सोशल मीडिया पर महिमामंडन करने वालों और उन्हें फॉलो करने वाले संदिग्ध युवाओं पर विशेष निगरानी रखी जाए. अपराधियों के सोशल नेटवर्क के साथ-साथ उनके वित्तीय नेटवर्क को भी खत्म करने की रणनीति अपनाई जाए.
साइबर अपराध पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री ने साइबर पेट्रोलिंग बढ़ाने और साइबर सेल में अतिरिक्त कार्मिक तैनात करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के मामलों में त्वरित कार्रवाई कर आम लोगों का विश्वास बहाल करना पुलिस की जिम्मेदारी है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्थान में साइबर अपराध का कोई भी नेटवर्क बचना नहीं चाहिए.
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों को अत्यंत गंभीर बताते हुए ऐसे मामलों में तत्काल और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए पुलिस पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से काम करे.
लंबित मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा होगी
मुख्यमंत्री ने सभी रेंज आईजी और एसपी को एनडीपीएस, गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर, अवैध हथियार और संगठित अपराध से जुड़े लंबित मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए. उन्होंने चेतावनी दी कि जिन जिलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी.
सीएलजी बैठकों पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (सीएलजी) की नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इससे पुलिस और आमजन के बीच संवाद बेहतर होगा और स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था मजबूत होगी. साथ ही सीएलजी बैठकों की मुख्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए.