पंजाब की पर्यावरण पहल को राष्ट्रीय सम्मान, पराली जलाने के मामलों में 94% कमी
- By Gaurav --
- Friday, 10 Apr, 2026
Punjab Wins Scotch Silver Award
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि राज्य ने पर्यावरण श्रेणी में प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड 2025 हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में पंजाब की रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के निरंतर और सुनियोजित प्रयासों को दिया।
पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि राज्य में फसली अवशेष यानी पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में जहां ऐसे मामलों की संख्या 83,002 थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह घटकर मात्र 5,114 रह गई है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और प्रभावी नीति-क्रियान्वयन का प्रमाण है।
मंत्री ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) और प्रदेश के किसान समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि किसानों की जागरूकता, सहयोग और प्रशासन की दूरदर्शी सोच का संयुक्त परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार पंजाब के किसानों की दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है, जिसमें आधुनिक मशीनरी पर सब्सिडी, रीयल-टाइम निगरानी, कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का प्रावधान शामिल है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन सभी किसानों को समर्पित है जिन्होंने पराली जलाने की हानिकारक परंपरा को छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाया है।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और पंचायतों को फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इस वर्ष 25,000 सीआरएम मशीनों की खरीद के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत लगभग 13,000 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और इसके लिए 427 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की जा चुकी है। मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग ने 1 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।
मंत्री ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में आई इस बड़ी कमी का सकारात्मक प्रभाव पर्यावरण के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी पड़ा है और वायु प्रदूषण में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि पंजाब का यह मॉडल इस बात का उदाहरण है कि सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, वित्तीय सहायता और समाज की सक्रिय भागीदारी से किसी भी पर्यावरणीय चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।